राजा भईया सोमवार को सीएम योगी आदित्यनाथ से मिले
सोमवार देर शाम रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से उनके आवास पर मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच करीब 20 मिनट की मुलाकात हुई। मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद पांच कालिदास मार्ग से राजा भैया मीडिया के कैमरों से बचकर चुपचाप निकल गये।
राजनीति में 25 साल पूरे होने पर 30 नवंबर को सूबे की राजधानी लखनऊ में राजा रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया अपनी नई पार्टी का ऐलान करेंगे। मायावती को छोड़कर वह लगभग हर सरकार में मंत्री बनते रहे हैं। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि सपा-भाजपा के करीबी रहे राजा भैया को आखिर अपनी नई पार्टी बनाने की जरूरत क्यों महसूस हुई? राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो अब राजा भैया के लिये पहले जैसे हालात नहीं रहे। राज्यसभा चुनाव में बसपा प्रत्याशी को वोट न देने से राजा भैया और अखिलेश के रिश्तों में बढ़ी तल्खी अब तक कायम है। बीजेपी में उन्हें भरपूर तरजीह मिलेगी, इसकी संभावना कम ही है। बसपा में उनके लिये जगह नहीं है, यह जग-जाहिर है। ऐसे में राजा भैया को नई राजनीतिक राह तलाशनी पड़ रही है।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि राजा भैया राजनीति के माहिर खिलाड़ी हैं।वह जानते हैं कि अभी बीजेपी का विरोध करना उनके लिये मुफीद नहीं है।ऐसे में वह शिवपाल की तरह सपा-बसपा के नाराज लोगों को लामबंद कर सकते हैं। बाद में जरूरत पड़ने पर वह बीजेपी के साथ कोई समीकरण बना सकते हैं।राजनीतिक जानकारों का कहना है कि नई पार्टी बनाने के लिए राजा भैया से ज्यादा उनके समर्थक उत्सुक हैं।





