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RBI के खिलाफ पहली बार सरकार ने धारा 7 का इस्तेमाल किया

Medhaj news 1 Nov 18 , 06:01:38 Governance
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केन्द्र सरकार और रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया के बीच सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है | पिछले कुछ दिनों से इस बात के साफ संकेत मिल रहे हैं | इन खबरों के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े हुए संगठन स्वदेशी जागरण मंच ने गवर्नर उर्जित पटेल को लेकर बड़ा बयान दिया है | सरकार ने अगर एक विशेष कानूनी धारा का इस्तेमाल करते हुए रिजर्व बैंक को कोई दिशा-निर्देश जारी किए तो गवर्नर उर्जित पटेल इस्तीफा दे सकते हैं। यह आरबीआई एक्ट की धारा 7 है, जिसके तहत सरकार ने पहली बार तीन पत्र रिजर्व बैंक को भेजे हैं। इसमें आरबीआई और सरकार के बीच सिर्फ सलाह-मशविरे का जिक्र किया गया है। इस धारा के तहत सरकार को आरबीआई के लिए निर्देश जारी करने का भी अधिकार है।





आरबीआई के डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य ने हाल में केंद्रीय बैंक की स्वायत्तता से संबंधित मुद्दा उठाया था | उन्होंने चेताया कि केंद्रीय बैंक की स्वायत्तता से छेड़छाड़ ‘विनाशकारी’ साबित हो सकती है | जिसके बाद इस प्रकार की खबरें आई थीं कि नाराज उर्जित पटेल इस्तीफा दे सकते हैं | हालांकि, इस विवाद पर बाद में सरकार की तरफ से भी सफाई दी गई | वित्त मंत्रालय द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि केन्द्र सरकार और रिजर्व बैंक दोनों के लिए जरूरी है कि वह जनहित और देश की अर्थव्यवस्था की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए काम करें | सरकार ने कहा है कि आरबीआई एक्ट के इस पक्ष के चलते केन्द्र सरकार और रिजर्व बैंक के बीच कई मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की जाती है | ऐसी व्यवस्था सभी नियामकों के लिए बनाई गई है |



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आरबीआई एक्ट की धारा 7 कहती है कि सरकार जनहित से जुड़े गंभीर मुद्दों पर आरबीआई गवर्नर से सलाह-मशविरा करने के बाद कुछ निर्देश जारी कर सकती है। आजाद भारत में आज तक इस धारा का कभी इस्तेमाल नहीं किया गया है।धारा 7 के दो हिस्से हैं। पहला सलाह-मशविरा करना, दूसरा दिशा-निर्देश जारी करना। सरकार के तीन पत्र अभी सलाह-मशविरे से ही जुड़े हैं। अगर सरकार ने धारा 7 के दूसरे हिस्से यानी दिशा-निर्देशों का पहली बार इस्तेमाल किया तो गवर्नर पद छोड़ सकते हैं।


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