Headline


राफेल पर डसॉल्ट के सीईओ बोले- हमने खुद किया अनिल अंबानी की कंपनी का चयन

Medhaj news 13 Nov 18 , 06:01:38 Governance
rafale.jpeg

राफेल डील को लेकर मचे सियासी बवाल के बीच इस फाइटर जेट को बनाने वाली कंपनी दसॉ एविएशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एरिक ट्रैपियर ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के आरोपों को खारिज किया है। ट्रैपियर ने एक इंटरव्यू में इस डील को लेकर राहुल के सभी आरोपों को बेबुनियाद बताया। न्यूज एजेंसी एएनआई को दिए इंटरव्यू में ट्रैपियर ने कहा, 'मैं झूठ नहीं बोलता। मैं पहले जो भी कहा और अब कह रहा हूं वह सच और सही है।' उन्होंने कहा कि दसॉ-रिलायंस जॉइंट वेंचर (जेवी) के ऑफसेट कॉन्ट्रैक्ट को लेकर पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद का बयान सही नहीं था।





डसॉल्ट के सीईओ एरिक ट्रैपियर का कहना है कि हमने खुद अनिल अंबानी का चयन किया था। रिलायंस के अलावा हमारे सामने 30 लोगों ने प्रस्ताव दिया था। इंडियन एयरफोर्स डील को इसलिए आगे बढ़ा रही थी क्योंकि उसे यकीन था कि राफेल फाइटर जेट उनकी सभी जरूरतों को पूरा करने में सक्षम हैं | एरिक ट्रैपियर ने कहा कि वो जानते हैं कि इस मुद्दे पर कुछ विवाद हैं। लेकिन सच ये भी है चुनावों के मौके पर घरेलू राजनीति की वजह से इस तरह के मामले सामने आते हैं। उनके लिए सबसे जरूरी बात है कि सच क्या है और सच यही है कि यह क्लीन डील है और भारतीय वायुसेना भी इस डील से खुश है।कांग्रेस पार्टी के साथ हमारे संबंध बहुत पुराने हैं। 1953 में भारत के पहले पीएम नेहरू के कार्यकाल में हमारी पहली डील साइन हुई। उसके बाद ये सिलसिला दूसरे प्रधानमंत्रियों के कार्यकाल में जारी रहा। हम किसी पार्टी के लिए काम नहीं कर रहे हैं। हम सिर्फ भारतीय वायुसेना और भारत की सरकार को सामरिक उत्पाद मुहैया करा रहे हैं और ये सबसे महत्वपूर्ण है।



PM मोदी ने अनंत कुमार के आवास पहुँचकर दी श्रद्धांजलि



राफेल जेट की कीमतों को समझाते हुए एरिक ट्रैपियर कहते हैं कि 36 राफेल विमानों के सौदे की कीमत 18 फ्लायावे के बराबर है। आप जानते हैं कि 36, 18 का दूना होता है। इस लिहाज से 36 विमानों की कीमत वहीं होनी चाहिए थी। लेकिन सरकार-सरकार के बीच समझौते होने की वजह से इसके दाम दूना होना चाहिए था। ये बात जानकार आपको हैरानी होगी कि डसॉल्ट को प्राइस बढ़ाने की जगह 9 फीसद कीमत घटानी पड़ी।जहां तक रिलायंस में पैसे डालने की बात है तो ये बात गलत है सौदे का पैसा डसॉल्ट- रिलायंस ज्वाइंट वेंचर में जा रहा है। डसॉल्ट के इंजीनियर और कर्मचारी इसके औद्योगिक उत्पादन में अग्रणी भूमिका में हैं। डसॉल्ट की जिम्मेदारी सिर्फ बेहतर उत्पाद मुहैया कराने की है और उस दिशा में हम आगे बढ़ चुके हैं।


    Comments

    Leave a comment



    Similar Post You May Like

    Trends