आज पीएम मोदी ने सर छोटूराम प्रतिमा का किया अनावरण
मंगलवार को, हरियाणा में प्रधानमंत्री सर छोटूराम की 64 फीट की प्रतिमा का अनावरण किया | सर छोटूराम को हरियाणा के बाहर भले ही ज्यादा लोग नहीं जानते लेकिन हरियाणा के किसानों के बीच सर छोटूराम एक जाना-पहचाना नाम है | पीएम मोदी सर छोटूराम की प्रतिमा के अनावरण के बाद उस म्यूजियम भी गए, जहां सर छोटूराम से जुड़ी कई चीजें संरक्षित की गई हैं | इस म्यूजियम में उनके जीवन को फिर से उकेरने का प्रयास भी किया गया है |
हरियाणा के रोहतक के सर छोटूराम को ब्रिटिश शासन में किसानों के अधिकारों के लिए आवाज बुलंद करने के लिए जाना जाता था | वे पंजाब प्रांत के सम्मानित नेताओं में से थे और उन्होंने 1937 के प्रांतीय विधानसभा चुनावों के बाद अपने विकास मंत्री के रूप में कार्य किया | उन्हें नैतिक साहस की मिसाल और किसानों का मसीहा माना जाता था | उन्हें दीनबंधू भी कहा जाता है | उनका असली नाम रिछपाल था और वो घर में सबसे छोटे थे, इसलिए उनका नाम छोटू राम पड़ गया | उन्होंने अपने गांव से पढ़ाई करने के बाद दिल्ली में स्कूली शिक्षा ली और सेंट स्टीफंस कॉलेज से ग्रेजुएशन पूरा किया | साथ ही अखबार में काम करने से लेकर वकालत भी की | कहा जाता है कि सर छोटूराम बहुत ही साधारण जीवन जीते थे | और वे अपनी सैलरी का एक बड़ा हिस्सा रोहतक के एक स्कूल को दान कर दिया करते थे | वकालत करने के साथ ही उन्होंने 1912 में जाट सभा का गठन किया और प्रथम विश्व युद्ध में उन्होंने रोहतक के 22 हजार से ज्यादा सैनिकों को सेना में भर्ती करवाया | 1916 में जब रोहतक में कांग्रेस कमेटी का गठन हुआ तो वो इसके अध्यक्ष बने | लेकिन बाद में महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन से असहमत होकर इससे अलग हो गए | उनका कहना था कि इसमें किसानों का फायदा नहीं था | उन्होंने यूनियनिस्ट पार्टी का गठन किया और 1937 के प्रोवेंशियल असेंबली चुनावों में उनकी पार्टी को जीत मिली थी और वो विकास व राजस्व मंत्री बने |
इस दौरान सर छोटूराम के पड़पोते और केंद्रीय स्टील मिनिस्टर चौधरी बीरेंद्र सिंह, हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर और हरियाणा के दूसरे नेता भी पीएम के साथ होंगे | सर छोटूराम बहुत ही साधारण जीवन जीते थे | और वे अपनी सैलरी का एक बड़ा हिस्सा रोहतक के एक स्कूल को दान कर दिया करते थे |





