प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वादा किया था - मैं देश नहीं झुकने दूंगा, मैं देश नहीं मिटने दूंगा- अमित शाह

Medhaj News 28 Feb 19 , 06:01:39 Governance
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुछ वर्ष पहले देश की जनता से वादा किया था- 'मैं देश नहीं झुकने दूंगा, मैं देश नहीं मिटने दूंगा। उन्होंने अपने इस वादे को राजस्थान के चुरू में फिर दोहराते हुए जनता को आश्वस्त किया कि देश सुरक्षित हाथों में है। कुछ समय से देश में यह धारणा विकसित होती गई कि चुनाव में नेता जो वादा करते हैं, बाद में उससे मुकरने लगते हैं। यह धारणा क्यों बनी, उस पर चर्चा जरूरी नहीं, किंतु यह जरूर है कि नरेंद्र मोदी ने इस धारणा को तोड़ा है। पांच साल पहले उन्होंने जनता से जो वादे किए थे, आज उन पर अमल के साथ जनता से संवाद कर रहे हैं। उन्होंने वादा किया था कि देश नहीं झुकने देंगे तो यह साबित करने पर ही वह इसे जनता के बीच दोहरा पा रहे हैं। सभी जानते हैं कि आतंकवाद आज दुनिया के लिए एक चुनौती है। भारत के सामने भी आतंकवाद को समाप्त करने की चुनौती बनी हुई है। यह लड़ाई दो स्तरों पर लड़नी है। एक, वैश्विक आतंकवाद को समाप्त करना और दूसरे, सीमापार से भारत को नुकसान पहुंचाने वाले आतंक से निपटना। नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में दोनों स्तरों पर भारत ने मजबूती के साथ अपनी 'जीरो टोलरेंस की नीति स्पष्ट की है। मोदी सरकार ने सत्ता संभालते ही इसे स्पष्ट कर दिया था। सीमापार से संचालित आतंकी गतिविधियों के खिलाफ यही हमारी नीति भी है और नीयत भी।  कश्मीर संकट के लिए भी पिछली सरकारों की तीन भूलें मूल वजह के रूप में सामने आती हैं। पहली भूल 1947 की है, जब सेना आगे बढ़ रही थी तो तत्कालीन सरकार ने उसे रोक दिया था। दूसरी भूल, तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू द्वारा इसे संयुक्त राष्ट्र में ले जाना थी। तीसरी भूल कांग्र्रेस सरकारों के दौरान तुष्टीकरण की राजनीति रही। इन ऐतिहासिक कारणों से कश्मीर की समस्या कायम है और कुछ नकारात्मक ताकतें इनका फायदा उठाकर मुगालते में हैं कि वे आतंक के सहारे कश्मीर को हथिया लेंगी। वे इस गलतफहमी को जितना जल्दी दूर कर लें, बेहतर है। पुलवामा हमले के एक दिन बाद ही प्रधानमंत्री मोदी ने देश की जनता को आश्वस्त किया कि इसे अंजाम देने वाले भले ही किसी कोने में छिपे हों, उनका बचना नामुमकिन है। ऐसा कहते हुए उन्हें केवल देश की जनता ही नहीं, बल्कि दुनिया भी देख रही थी। यह बदलते भारत का स्वर था। उनकी कथनी में भारत के मजबूत आत्मविश्वास और निर्णायक रक्षानीति की स्पष्ट ध्वनि थी। इसके दम पर ही हमारी वायुसेना ने पाकिस्तान में घुसकर जैश-ए-मोहम्मद के तीन बड़े आतंकी ठिकानों को ध्वस्त कर दिया। आजादी के बाद भारतीय वायुसेना ने पहली बार दुश्मन देश के घर में घुसकर उसे नेस्तनाबूत किया। पाकिस्तान में भारत के हवाई हमले के बाद हमारे शहीद जवानों के परिवारों को जरूर सुकून मिला होगा। हम अपने वीर जवानों के प्रति संवेदनशील भी हैं और उनकी पीड़ा में सहभागी भी हैं। केंद्र में मोदी सरकार बनने के बाद स्थितियां बदली हैं। आतंकियों के लिए संचालन दूभर हो गया। सीमावर्ती क्षेत्रों को छोड़ दें तो सरकार के पांच वर्षों में कोई आतंकी घटना नहीं हुई। सीमा पर भी हमें छेड़ा गया तो हमने भी छोड़ा नहीं। उरी हमले के बाद हुई सर्जिकल स्ट्राइक को देश भूला नहीं है। तब लंदन में एक कार्यक्रम में पीएम मोदी ने कहा था कि पाक पोषित आतंकवाद का समाधान एक सर्जिकल स्ट्राइक से संभव नहीं। यह लंबी लड़ाई है। आज भारत उस लंबी लड़ाई को लड़ने के लिए तैयार है।आत्मरक्षा और सीमापार से हो रहे आतंकवाद से निपटने के लिए हम अब किसी महाशक्ति के भी मोहताज नहीं रहे। नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नया भारत स्वयं अपनी रक्षा व आतंकवाद से मुक्ति की जंग का नेतृत्वकर्ता बनने की स्थिति में है। यही कारण है कि पुलवामा हमले के बाद दुनिया के तमाम देशों से भारत को समर्थन मिला। यह सच है कि आज देश उम्मीदों की उमंग में जी रहा है। पांच साल पहले का निराशा-हताशा वाला दौर अब गया-गुजरा हो गया है। देश को लगा है कि बहुत कुछ बदल गया है और आगे हालात बेहतर होंगे, क्योंकि उसे भरोसा है कि 'मोदी हैं तो मुमकिन है। बीते पांच वर्षों में बहुआयामी विकास के दम पर देश नई ऊंचाई की ओर अग्र्रसर है। बदलते नए भारत में आतंकवाद जैसी रुकावटें बाधा नहीं बन सकतीं, क्योंकि हमारी नीयत साफ, नीति स्पष्ट और निर्णय में कोई भ्रम नहीं है।


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