नरेंद्र मोदी ने बच्चों को एग्जाम फोबिया से बचने के दिए टिप्स

Medhaj News 29 Jan 19 , 06:01:39 Governance
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प्रधानमंत्री मोदी इस कार्यक्रम में अभिभावकों से तनाव-रहित परीक्षा एवं संबंधित पहलुओं पर चर्चा कर रहे हैं | बच्चों को एग्जाम फोबिया से बचने के टिप्स भी  दिए। उन्होंने कहा मुझे इस कार्यक्रम के तहत किसी को उपदेश नहीं देना है बल्कि मैं आप लोगों की तरह कुछ पल जीना चाहता हूं। इस कार्यक्रम में अभिभावकों से तनाव-रहित परीक्षा एवं संबंधित पहलुओं पर चर्चा कर उनके सवालों के जवाब देते हुए ,कोलकाता से रूली दत्ता का पीएम नरेंद्र मोदी से सवाल किया, एक अध्यापक होने के नाते उन अभिभावकों को क्या कहना चाहिए जो ये समझते हैं कि परीक्षा से उनके बच्चों का भविष्य या तो बन सकता है या बिगड़ सकता है? इसी से मिलता जुलता ही एक और सवाल रोहित ने भी किया। वे दिल्ली से रहकर सिविल सर्विस की तैयारी कर रहे हैं। इस पर प्रधानमंत्री ने कहा, हमें खुद ये पूछना चाहिए कि क्या ये परीक्षा जिंदगी की है या किसी कक्षा की?। अगर इतना ही हम सोच लें तो हमारा जो बोझ है वह कम हो जाएगा और एक काम के लिए फोकस भी बढ़ जाएगा। उन्होंने कहा कि जो कहते हैं कि अभी नहीं तो कभी नहीं वाला भाव कुछ नहीं है। परीक्षा के बाहर भी बहुत बड़ी दुनिया होती है। परीक्षा में असफलता का सामना करने वालों के लिए संदेश देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, एक कविता की पंक्तियां मुझे याद हैं कि कुछ खिलौनों के टूटने से बचपन नहीं मरा करता है। इन पंक्तियों में एक बहुत बड़ा संदेश है। एक-आध परीक्षा में कुछ इधर-उधर हो जाए तो जिंदगी ठहर नहीं जाती है। लोग कहते हैं मोदी ने बहुत उम्मीदें जगा दी हैं, मैं तो चाहता हूं कि सवा सौ करोड़ देशवासियों के सवा सौ करोड़ उम्मीदें होनी चाहिएं। हमें उन अपेक्षाओं को उजागर करना चाहिए देश तभी चलता है। अपेक्षाओं के बोझ में दबना नहीं चाहिए। हमें अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए अपने आपको सिद्ध करना चाहिए।  PM नरेंद्र मोदी ने स्कूली विद्यार्थियों के साथ 'परीक्षा पर चर्चा' के दौरान कहा -दबाव से परिस्थिति बिगड़ जाती है, बच्चे पर परीक्षा का दबाव न बनाएं | माता-पिता को भी ध्यान रखना चाहिए कि बच्चे पर अनावश्यक दबाव न बनाया जाए | माता-पिता को बच्चों पर अपने सपने नहीं थोपने चाहिए | इस परिचर्चा में देशभर से और 20 से अधिक देशों के विद्यार्थी भाग ले रहे हैं  | 





शिक्षा व्यवस्था पर पीएम मोदी ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था एक दिन में तैयार नहीं हुई है। हजारों सालों की मेहनत और यात्रा के बाद यहां तक पहुंची है। लेकिन हमने खुद को शिक्षा को जिंदगी से काटकर परीक्षा से जोड़ दिया है। इसके लिए पीएम मोदी ने उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि जैसे कि अनुशासन हमारे सिलेबस में नहीं होता लेकिन उसका पालन किया जाता है। पीएम ने कहा कि शिक्षा के हर पहलू को जिंदगी से जोड़ने की आदत होनी चाहिए। जब बच्चा चलना सीखता है और चलते हुए गिरता है तो मां ताली बचाती है | मां ताली इसलिए नहीं बजाती कि उसके गिरने से उसे खुशी हुई | बल्कि इसलिए बजाती है कि बच्चा सीखे कि गिरना भी बुरा नहीं है | वह गिरता है, सीखता है और फिर मां उसकी पसंद की कोई चीज लेकर दूर खड़ी हो जाती है | बच्चा उस चीज की उम्मीद में चलकर जाता है | बस ऐसी ही होती हैं उम्मीदेंः पीएम मोदी



 एक छात्रा ने सवाल किया कि हर बच्चे का टैलेंट और इंटरेस्ट अलग होता है | इस पर पीएम ने कहा- हर कोई बच्चों को अलग-अलग सलाह देता है और उससे बच्चे कन्फ्यूज हो जाते हैं | ऐसे में बच्चे को खुद यह पहचानना होगा कि उसे क्या करना अच्छा लगता है | उसका पैशन क्या है?


    Comments

    • Medhaj News
      Updated - 2019-01-29 18:32:03
      Commented by :Gunjan

      It's good for Indian kids & upcoming generation!


    • Medhaj News
      Updated - 2019-01-29 17:14:20
      Commented by :bheem nishad

      Hi


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