अभी तक युवराज सिंह की विदाई पर इन खिलाड़ियों ने नहीं दी बधाई
आईसीसी वर्ल्ड कप-2019 में टीम इंडिया का अब तक प्रदर्शन दमदार रहा है | दक्षिण अफ्रीका के बाद ऑस्ट्रेलिया को मात देकर भारतीय खेमा खुश है | इस बीच युवराज सिंह के संन्यास की खबर भी टीम इंडिया तक पहुंच चुकी है | 15 सदस्यीय भारतीय टीम से सिर्फ 10 खिलाड़ी ही उन्हें ट्विटर के जरिए सोमवार रात तक बधाई भेजी थी | कोच रवि शास्त्री ने भी ट्विटर पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है | उनके अलावा ट्विटर के जरिए बधाई संदेश ना भेजने वालों में पूर्व कप्तान व टीम इंडिया के विकेटकीपर महेंद्र सिंह धोनी, रवींद्र जडेजा, दिनेश कार्तिक, विजय शंकर और कुलदीप यादव शामिल हैं | टीम इंडिया के चैंपियन ऑलराउंडर युवराज सिंह ने आज क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास की घोषणा कर दी। युवराज सिंह भारत की दो वर्ल्ड चैंपियन (2007 में वर्ल्ड टी20 और 2011 में वर्ल्ड कप) टीमों का हिस्सा रहे और दोनों ही टूर्नमेंट्स में उन्होंने अपने प्रदर्शन से खास छाप छोड़ी थी। 2017 के बाद से ही उनका चयन भारतीय टीम में नहीं हो पा रहा था। बताया जा रहा है कि 37 वर्षीय युवराज आईसीसी से मान्यता प्राप्त विदेशी टी20 लीग में बतौर फ्रीलांस क्रिकेटर करियर बनाना चाहते हैं। उन्हें जीटी20 (कनाडा), आयरलैंड और हॉलैंड में यूरो टी20 स्लैम में खेलने के ऑफर मिल रहे हैं।

यह स्टालिश लेफ्ट हैंडर बल्लेबाज आखिरी बार भारत के लिए फरवरी 2017 में इंग्लैंड के खिलाफ टी20 इंटरनैशनल मैच में खेले थे। इससे पहले वह चैंपियंस ट्रोफी 2017 और उसके बाद वेस्ट इंडीज दौरे पर गई भारतीय टीम का हिस्सा रहे थे। उन्होंने अपने करियर का आखिरी वनडे मैच 30 जनवरी 2017 को वेस्ट इंडीज के खिलाफ एंटीगुआ में खेला था। अपनी इस रिटायरमेंट का ऐलान युवराज प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे हैं। इस मौके पर उन्होंने बताया - बचपन से मैंने अपने पिता का देश के लिए खेलने का सपना पूरा करने की कोशिश की। उन्होंने यहां अपने क्रिकेट करियर को याद करते हुए कहा - अपने 25 साल के करियर और खास तौर पर 17 साल के अंतरराष्ट्रीय करियर में कई उतार-चढ़ाव देखे। अब मैंने आगे बढ़ने का फैसला ले लिया है। इस खेल ने मुझे सिखाया कि कैसे लड़ना है, गिरना है, फिर उठना है और आगे बढ़ जाना है।’ युवी ने यहां एक क्रिकेटर के तौर पर कामयाब होने का श्रेय अपने पिता को दिया। उन्होंने कहा - मैंने जिंदगी में कभी हार नहीं मानी। मैंने अपने पिता का सपना पूरा किया।


