आज गोरखपुर में योगी जी ने लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल जी की प्रतिमा का लोकार्पण किया
आज जनपद गोरखपुर में भारत की एकता और अखंडता के प्रतीक 'भारत रत्न' लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल जी की प्रतिमा के सुंदरीकरण कार्य का योगी जी ने लोकार्पण किया। लोकार्पण के समय और भी नेता वह मौजूद थे |लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल जी आज हमारे सामने मौजूद नहीं है लेकिन उनके विचार आज भी जीवित है | 'लौहपुरुष' सरदार वल्लभभाई पटेल भारत के पहले गृहमंत्री थे। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद देशी रियासतों का एकीकरण कर अखंड भारत के निर्माण में उनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता है। आज हम जिन्हें किताबो में पढ़ते हैं, जिनके आदर्शों पर चलने की बात करते हैं, वो भी हमारे आपके जैसे आम इंसान ही थे, लेकिन उन्होंने अपने कर्म, तपस्या और त्याग के बल पर आज खुद को जीवन मरण से मुक्त कर लिया है, उनके आदर्श और सोच आज भी हमारे बीच जिंदा हैं। सरदार पटेल अन्याय नहीं सहन कर पाते थे। अन्याय का विरोध करने की शुरुआत उन्होंने स्कूली दिनों से ही कर दी थी।
नडियाद में उनके स्कूल के अध्यापक पुस्तकों का व्यापार करते थे और छात्रों को बाध्य करते थे कि पुस्तकें बाहर से न खरीदकर उन्हीं से खरीदें। वल्लभभाई ने इसका विरोध किया और छात्रों को अध्यापकों से पुस्तकें न खरीदने के लिए प्रेरित किया। परिणामस्वरूप अध्यापकों और विद्यार्थियों में संघर्ष छिड़ गया। 5-6 दिन स्कूल बंद रहा। अंत में जीत सरदार की हुई। अध्यापकों की ओर से पुस्तकें बेचने की प्रथा बंद हुई। सरदार पटेल को अपनी स्कूली शिक्षा पूरी करने में काफी समय लगा। उन्होंने 22 साल की उम्र में 10वीं की परीक्षा पास की। सरदार पटेल का सपना वकील बनने का था और अपने इस सपने को पूरा करने के लिए उन्हें इंग्लैंड जाना था, लेकिन उनके पास इतने भी आर्थिक साधन नहीं थे कि वे एक भारतीय महाविद्यालय में प्रवेश ले सकें। उन दिनों एक उम्मीदवार व्यक्तिगत रूप से पढ़ाई कर वकालत की परीक्षा में बैठ सकते थे। ऐसे में सरदार पटेल ने अपने एक परिचित वकील से पुस्तकें उधार लीं और घर पर पढ़ाई शुरू कर दी।बारडोली सत्याग्रह का नेतृत्व कर रहे पटेल को सत्याग्रह की सफलता पर वहां की महिलाओं ने 'सरदार' की उपाधि प्रदान की। आजादी के बाद विभिन्न रियासतों में बिखरे भारत के भू-राजनीतिक एकीकरण में केंद्रीय भूमिका निभाने के लिए पटेल को 'भारत का बिस्मार्क' और 'लौहपुरुष' भी कहा जाता है। सरदार पटेल वर्णभेद तथा वर्गभेद के कट्टर विरोधी थे।


















