सुप्रीम कोर्ट ने मराठा आरक्षण पर सरकार से 2 हफ्ते में जवाब मांगा
बॉम्बे हाई कोर्ट द्वारा मराठा आरक्षण को बरकरार रखने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट महाराष्ट्र सरकार को नोटिस जारी कर 2 हफ्ते में जवाब मांगा है | मराठों को 16 फीसद आरक्षण दिए जाने के सरकार के निर्णय के विरुद्ध दायर याचिका पर करीब डेढ़ महीने बहस के बाद हाईकोर्ट का निर्णय आया था | एक याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अरविंद दातार ने कोर्ट में तर्क दिया था कि सरकार द्वारा किया गया 16 फीसद आरक्षण का प्रावधानपूरी तरह संविधान के विरुद्ध है | क्योंकि यह सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगाई गई 50 फीसद की सीमा के अधिक नहीं हो सकता, उनका कहना था कि महाराष्ट्र में 52 फीसद आरक्षण पहले से लागू है | 16 फीसद और दिए जाने के बाद यह 68 फीसद पर पहुंच जाएगा | सुप्रीम कोर्ट ने हाइकोर्ट के फैसले पर रोक लगाने से किया इनकार करते हुए कहा है कि अभी जो दाख़िले होंगे वह सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले पर निर्भर होंगे |
सुप्रीम कोर्ट ने हाइकोर्ट के फैसले पर रोक लगाने से किया इनकार करते हुए कहा है कि अभी जो दाख़िले होंगे वह सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले पर निर्भर होंगे | राज्य सरकार ने विधानसभा में कानून पास करके मराठा समुदाय को शैक्षिक संस्थानों में प्रवेश और सरकारी नौकरियों में 16 फीसद आरक्षण देने की सिफारिश की थी | जब इस फैसले को चुनौती दी गई तो हाई कोर्ट ने आरक्षण का फैसला तो बरकरार रखा, लेकिन इसकी सीमा शैक्षिक संस्थानों में घटाकर 12 फीसद और सरकारी नौकरियों में 13 फीसद कर दी थी | गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट में एक एनजीओ की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षण को लेकर 50% की समयसीमा तय की थी | ऐसे में हाई कोर्ट का फैसला सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ है | दरअसल, बाॅम्बे हाईकोर्ट ने मराठा आरक्षण पर मुहर लगा दी थी | हाईकोर्ट ने सरकार के निर्णय पर मुहर लगाते हुए कहा था कि सरकार को एक अलग श्रेणी बनाकर सामाजिक व शैक्षणिक रूप से पिछड़े मराठों को इस प्रकार आरक्षण देने का अधिकार है, लेकिन न्यायमूर्ति द्वय रंजीत मोरे एवं भारती डांगरे की खंडपीठ ने सरकार द्वारा दी गई 16 फीसद की सीमा को कम करने का आदेश देते हुए इसे 12-13 फीसद पर लाने को कहा है |






















