कादर खान की इन लाइनों पर अमिताभ बच्चन ने बटोरी तालिया

Medhaj News 1 Jan 19,20:52:05 Entertainment
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2019 की पहली सुबह जब सारा जहां नये साल का इस्तकबाल कर रहा था तब हिंदी सिनेमा के बेहतरीन अभिनेता कादर खान इस दुनिया को अलविदा कह गये  वह 81 साल के थे। बेटे सरफराज ने कादर खान के निधन की पुष्टि की है। वह लंबे समय से बीमार चल रहे थे और पिछले कुछ समय से कनाडा के एक अस्पताल में भर्ती थे। बॉलीवुड सितारों से लेकर राजनीतिक हस्तियों और आम लोगों ने उन्हें सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि अर्पित की है। कादर ख़ान उन चंद हुनरमंदों में शुमार होते हैं, जिनमें बहुमुखी प्रतिभा के धनी होते हैं। अपने पांच दशकों से ज़्यादा लम्बे करियर में कादर ख़ान ने तक़रीबन हर तरह के किरदार को पर्दे पर पेश किया। विलेन बने। कॉमेडी की और चरित्र रोल भी निभाये। मगर, उनकी सबसे अधिक चर्चा उनके ख़ास तरह के संवादों के लिए होती है, जिनमें वक़्त और दौर की ज़रूरत के साथ ज़िंदगी का एक फलसफा छिपा रहता था। भूख, ग़रीबी, भ्रष्टाचार पर एक टिप्पणी होती है। कादर ख़ान ने वैसे तो कई पीढ़ियों के साथ काम किया है, मगर सबसे ज़्यादा उन्हें अमिताभ बच्चन और गोविंदा के साथ काम करने के लिए जाना जाता है। गोविंदा के साथ कादर ख़ान ने जहां अधिकतर कॉमेडी फ़िल्में कीं, वहीं अमिताभ के साथ संजीदा क़िस्म के किरदार निभाये। कभी भाई तो कभी दुश्मन के रोल में पर्दे पर नज़र आये। कादर खान के निधन की खबर सुनते ही अमिताभ के आंसू छलक पड़े | 





कादर ख़ान के लिखे कुछ मुख्य संवाद:-



बाप नंबरी बेटा दस नंबरी- तुम्हें बख्शीश कहां से दूं। मेरी ग़रीबी का तो यह हाल है कि किसी फकीर की अर्थी को भी कंधा दूं तो अपनी इंसल्ट मानकर अर्थी से कूद जाता है।



नसीब- अरे औरों के लिए गुनाह सही, हम पियें तो शबाब बनती है। अरे सौ ग़मों को निचाड़ने के बाद एक कतरा शराब बनती है।



हम- क्या इश्क़ का ख़ून किसी साहूकार के पान की पिचकारी है। क्या तुम्हारी ज़िंदगी ज़िंदगी, हमारी बीमारी है। तुम्हार ख़ून ख़ून, हमारा ख़ून पानी है। तुम्हारा नाम नाम, हमारा नाम गाली है। तुम करो ज़ुल्म तो वो सरकारी है और हमारी फरियाद गद्दारी है।


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