550वें प्रकाश पर्व को समर्पित पहला अंतर्राष्ट्रीय नगर कीर्तन
भारत की आजादी के 72 साल बाद सिखों के पहले गुरु श्री गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व को समर्पित पहला अंतर्राष्ट्रीय नगर कीर्तन श्री ननकाना साहिब की पवित्र धरती से, सिरसा ने बताया कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी पालकी में सुशोभित होंगे और इस नगर कीर्तन का नजारा देखते ही बनेगा। इसकी खुशी शब्दों में बयान करनी मुश्किल है क्योंकि सिखों की 72 साल पुरानी इच्छा को उस परमात्मा की कृपा से पूरी हुई है, जब पहले गुरु श्री गुरु नानक देव जी के जन्म स्थान से दुनिया का पहला नगर कीर्तन सजाया | उन्होंने कहा कि नगर कीर्तन सारे संसार में बसते नानक नाम लेवा लोगों को शांति और सद्भावना के साथ-साथ परमात्मा का नाम सिमरन करने, मिल बांट कर खाने और आपसी भाईचारा बनाए रखने का संदेश देगा। सिरसा नेआगे कहा कि अकाल पुरुख की रहमत से इतिहास रचा गया है जब श्री अकाल तख्त साहिब की छत्र छाया में कौम के सारे संगठन एकजुट होकर नगर कीर्तन की सेवा करके आगे आए हैं।
उन्होंने कहा कि इन संगठनों में शिरोमणी गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी, दिल्ली गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी, तख्त श्री पटना साहिब मैनेजमेंट कमिटी, तख्त श्री हजूर साहिब मैनेजमेंट कमिटी, निहंग सिंह जत्थेबंदियां ने ऐसी एकजुटता दिखाई है, जिससे कौम को बड़ा संदेश मिला है। सिखों ने गुरु नानकदेव के जन्म स्थान ननकाना साहिब में नगर कीर्तन में हिस्सा लिया और फिर वाघा सीमा के रास्ते ये कीर्तन भारत में दाखिल हुआ | अटारी पर हजारों की संख्या में लोग पालकी साहिब के स्वागत में खड़े थे। यहां एसजीपीसी की वैन खड़ी थी, जिसमें पुरातन शस्त्रों के अलावा पहली बार गुरु नानक देव जी की खड़ाऊं संगत की दर्शन को नगर कीर्तन में रखी गई। अंग्रेजों से आजादी और भार-पाकिस्तान के रूप में हुए बंटवारे के बाद पहली बार ऐसा मौका है, जब ननकाना साहिब से अमृतसर तक इतनी बड़ी धार्मिक यात्रा पहुंची है। नगर कीर्तन सुबह ननकाना साहिब से रवाना हुआ और दोपहर में भारत पहुंचा। अटारी बाॅर्डर में पहुंचने पर नगर कीर्तन का रेड कार्पेट बिछाकर पुष्पवर्षा कर भव्य स्वागत किया गया।




