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धनतेरस का पर्व क्यों मनाया जाता है और इसके पीछे की क्या मान्यताएं है जाने

Medhaj News 25 Oct 19 , 06:01:39 India
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देशभर में आज धनतेरस का पर्व मनाया जाएगा | कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को मनाए जाने वाले इस पर्व का हिन्दू परंपरा में खास महत्व है | इस दिन विशेष तौर पर धन की देवी माता लक्ष्मी, कुबेर और यमराज के पूजन का विधान है | इस दिन अमीर-गरीब सभी कुछ न कुछ खरीदारी करते हैं | मान्यता है कि इस दिन कुछ खरीदने से माता लक्ष्मी की पूरे साल कृपा बनी रहती है | धनतेरस का पर्व क्यों मनाया जाता है और इसके पीछे की क्या मान्यताएं हैं |  दरअसल, मान्यता है कि इसी दिन समुद्र मंथन से भगवान धन्वंतरि प्रकट हुए थे | मान्यता है कि इस दिन खरीदारी करने से धनों में 13 गुना वृद्धि होती है | 





कथाओं के अनुसार भगवान धन्वंतरि जब प्रकट हुए थे तो उनके हाथ में एक अमृत कलश था | यह भी एक कारण है कि लोग इस दिन बर्तन खरीदने को प्राथमिकता देते हैं | धनतेरस की शाम को तिल के तेल से आटे या पीतल का दीप जलाएं | शाम की पूजा में सबसे पहले गणेशजी की पूजा करें और इसके बाद  लक्ष्मीजी की पूजा करने के बाद भगवान धन्वंतरि और यमराज जी की पूजा करें | पूजा के बाद दक्षिण दिशा की ओर मुंह करके यमराज को जल दें | पूजा के बाद अनाज का दान करें | आपको बता दें कि धनतेरस के दिन गणेशजी की स्थापना करने विशेष लाभ होता है | धनतेरस पर साफ-सफाई का खासा महत्व है |  मान्यता है कि जहां स्वच्छता है वहीं माता लक्ष्मी रहती हैं | उपायों के तौर पर पूजा घर में सुगंध फैलाने के लिए इत्र का इस्तेमाल करें | धनतेरस के सूर्योदय से लेकर भाई दूज की रात तक रोजाना 11 मालाएं ‘ओम लक्ष्मये नम:’ का जाप करें | जाप की माला कमलगट्टे की होनी चाहिए | जप करते समय किसी प्रकार का कोई और कार्य ना करें | अष्टमी के दिन घर पर 8 साल से कम की कन्या को भोजन कराएं और कन्या को उपहार दें |



धनतेरस पर पूजा का शुभ मुहूर्त-

शाम 7 बजकर 10 मिनट से 8 बजकर 15 मिनट तक

प्रदोष काल-5 बजकर 42 मिनट से 8 बजकर 15 मिनट तक

वृषभ काल-6 बजकर 51 मिनट से 8 बजकर 47 मिनट तक


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