जीत के लिए अपने भाषणों में सेना के नाम का उपयोग करने के आरोपों को नरेंद्र मोदी ने खारिज कर कहा...
लोकसभा चुनाव 2019 में जीत के लिए अपने भाषणों में सेना के नाम का उपयोग करने के आरोपों को खारिज करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को कहा कि राष्ट्रवाद और सैनिकों का बलिदान भी उतने ही महत्वपूर्ण चुनावी मुद्दे हैं जितना किसानों की मौत | दूरदर्शन को दिए एक साक्षात्कार में पीएम मोदी ने कहा कि देश पिछले 40 साल से आतंकवाद से जूझ रहा है | कांग्रेस की न्यूनतम आय योजना ‘‘न्याय'' पर टिप्पणी करते हुए मोदी ने कहा कि इस घोषणा के साथ ही कांग्रेस ने यह मान लिया है कि पिछले 60 साल में उसने देश के लोगों के साथ ‘महान अन्याय' किया है | उन्होंने कहा -यदि हम लोगों को नहीं बताएंगे कि इस पर (आतंकवाद पर) हमारे विचार क्या हैं तो फिर इसमें क्या तर्क रह जाएगा | क्या कोई देश बिना राष्ट्रवाद की भावना के आगे बढ़ सकता है? पीएम मोदी ने कहा -एक ऐसे देश में जहां हजारों की संख्या में इसके सैनिकों ने बलिदान दिया हो, क्या यह चुनावी मुद्दा नहीं होना चाहिए? जब किसान की मौत होती है तो वह चुनावी मुद्दा बन जाता है लेकिन जब एक सैनिक शहीद होता है तो वह चुनावी मुद्दा नहीं बन सकता? यह कैसे हो सकता है?' कि पिछले हफ्ते पीएम मोदी ने एक चुनावी सभा में पहली बार मताधिकार का उपयोग करने वाले मतदाताओं से प्रश्न किया था कि क्या वह अपना पहला मत पाकिस्तान के बालाकोट में किए गए हवाई हमले को समर्पित कर सकते हैं | साथ ही उन्होंने लोगों से उनका वोट पुलवामा आतंकी हमले में शहीद हुए सैनिकों को समर्पित करने का भी अनुरोध किया था | उनके इस बयान पर विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री चुनाव में जीत के लिए सुरक्षा बलों के नाम का उपयोग कर रहे हैं | चुनाव आयोग ने इस बात का संज्ञान लिया है और वह पीएम मोदी के भाषण की समीक्षा कर रही है | प्रधानमंत्री ने यह बयान महाराष्ट्र के लातूर में दिया था | वहां के चुनाव अधिकारियों ने चुनाव आयोग को सूचित किया है कि प्रथम दृष्टया यह आयोग के आदेश का उल्लंघन लगता है | आयोग ने पार्टियों से चुनाव में सैन्य बलों के नाम का उपयोग करने पर रोक लगायी है |


