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अमेरिका-चीन के बीच जारी ट्रेड वॉर का असर जल्द भारत पर भी दिखेगा

Medhaj News 15 May 19,17:43:54 World
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अमेरिकी की ओर से जारी ट्रेड वॉर के असर से भारतीय रुपये में कमज़ोरी बढ़ने लगी है | एक अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 2 महीने के निचले स्तर 70.50 पर आ गया है | एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर चीन और अमेरिका में ट्रेड वॉर और गहराती है तो भारत के रुपये में तेज़ गिरावट आ सकती है | पिछले साल ट्रेड वॉर जैसे हालात में चीन की करेंसी युआन में 11 मई से 31 अक्टूबर के बीच 10 फीसदी की गिरावट आई थी और डॉलर की तुलना में रुपया भी इतना ही कमजोर हुआ था | भारत में निवेश करने वालों को लग रहा है कि फिर से वैसा ही होने जा रहा है | पिछले साल 11 अक्टूबर को डॉलर के मुकाबला रुपया 74.48 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया था | भारतीय करंसी पर चुनाव संबंधी अनिश्चितता और विदेशी निवेशकों के पैसा निकालने से भी बुरा असर पड़ रहा है | विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने इस महीने 2,555 करोड़ रुपये निकाले हैं, जबकि एक महीना पहले उन्होंने 16,728 करोड़ का निवेश किया था | 





भारत अपनी जरूरत का करीब 80 फीसदी पेट्रोलियम प्रोडक्‍ट आयात करता है | रुपए में गिरावट से पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स का आयात महंगा हो जाएगा | तेल कंपनियां पेट्रोल-डीजल की घरेलू कीमतों में बढ़ोत्‍तरी कर सकती हैं | डीजल के दाम बढ़ने से माल ढुलाई बढ़ जाएगी, जिसके चलते महंगाई में तेजी आ सकती है | इसके अलावा, भारत बड़े पैमाने पर खाद्य तेलों और दालों का भी आयात करता है | रुपए के कमजोर होने से घरेलू बाजार में खाद्य तेलों और दालों की कीमतें बढ़ सकती हैं | विदेश में पढ़ने वाले बच्चों पर खर्चा रुपए की गिरावट के साथ-साथ बढ़ता जाता है | भारतीय छात्रों के लिए यूएस, ब्रिटेन, कनाडा, सिंगापुर और ऑस्ट्रेलिया जैसी जगाहें पढ़ाई के लिहाज से सबसे पसंदीदा ऑप्शन्स हैं | विदेश की यूनिवर्सिटीज में ज्यादा ट्यूशन फीस होती है और अब रुपए की कमजोरी से इन देशों की करेंसी के मुकाबले ज्यादा रुपए आपको खर्च करने होंगे | इससे पढ़ाई का खर्चा बढ़ जाएगा | देश में कई जरूरी दवाएं बाहर से आती हैं | डॉलर के मुकाबले रुपए में गिरावट की वजह से दवाओं के आयात के लिए ज्यादा कीमत चुकानी पड़ती है जिससे वह महंगी हो जाती हैं | रुपए में गिरावट का फायदा निर्यातकों खासकर आईटी, फार्मा, टेक्‍सटाइल, डायमंड, जेम्‍स एवं ज्‍वैलरी सेक्‍टर को मिलेगा | इसके अलावा देश से चाय, कॉफी, चावल, गेहूं, कपास, चीनी, मसाले का भी अच्‍छा खासा निर्यात होता है | यानी कृषि और इससे जुड़े उत्‍पाद के निर्यातकों को भी रुपए में गिरावट का लाभ होगा |


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