सीख रही हूँ
सीख रही हूँ प्रतिदिन,
जीवन जीने के नए तरीके;
मुस्कुरा कर ज़ख्मों को,
सहने के नए तरीके।
यहाँ हर एक की पसंद,
और फरमाइशें अलग हैं;
सीख रही हूँ प्रेम से 'नहीं',
कहने के कुछ तरीके।
उम्मीदें हैं कुछ अपनों की,
जो मेरी चाहतों पर भारी हैं;
सीख रही हूँ ऐसे अपनों से,
दूर रहने के कुछ तरीके।
अक्सर ही भरी भीड़ में,।
तन्हा पाया है खुद को मैंने;
सीख रही हूँ अब एकांत में ही,
खुश रहने के कुछ तरीके
जीवन उलझनों का जाल है,
हर मोड़ पर नये समीकरण, नये सवाल है;
सीख रही हूँ बिना धैर्य खोये,
उनको हल करने के कुछ तरीके।
वर्तमान में बेचैन जिंदगी की वज़ह,
महत्वाकांक्षाओं का विस्तार है,
सीख रही हूँ उच्चाकांक्षाओं को,
सीमित रखने के कुछ तरीके।
सीख रही हूँ खुद के लिये ,
समय खर्च करने के कुछ तरीके;
सीख रही हूँ बेतकल्लुफी से,
खुलकर हँसने के कुछ तरीके।
---(भावना मौर्या)---






















