लोगो को पसंद आई साउथ की मूवी KGF
रॉकी एक महत्वाकांक्षी लड़का है, जो सबसे ज्यादा अमीर और सफल आदमी बनकर मरने का ख्वाब देखता है और यह सपना उसका खुद का नहीं बल्कि उसकी मां का है। मुंबई के सड़कों से लेकर KGF के मैदान तक वह बस अब अपने इसी लक्ष्य को पूरा करने में जुट जाता है।
मूवी रिव्यू
फिल्म का सबसे इंटरेस्टिंग पार्ट है फिल्म का स्क्रीनप्ले और कहानी का पैटर्न लोगों को एंगेज रखने में सफल नजर आती है, जिसमें कि रॉकी धीरे-धीरे अपने अंदाज़ में ढलता नजर आता है। फिल्म में सीन और डायलॉग्स इतने शानदार हैं कि लोग तालियां और सीटी बजाने से खुद को रोक नहीं पाते। फिल्म की कहानियों के बीच तालमेल बिठाने के लिए मेकर्स ने काफी चालाकी से इसकी कहानी दर्शकों के सामने रखी है। इस फिल्म में 1951 के दौर से लेकर साल 2018 तक का सफर है, जिसमें हर किरदार को दर्शकों में उत्साह बनाए रखने में मेकर्स सफल रहे हैं।

फिल्म के पहले हिस्से की कहानी रॉकी के किरदार को तैयार करने का काम करती है, जो कि तब तक नहीं रुकता है जब तक कि वह अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंच जाता। यहां तक कि बाकी के किरदार भी रॉकी के किरदार को ऊंचाई तक ले जाने में अच्छा ताना-बाना बुनते हैं। 'केजीएफ' उस कहानी को बयां करने में पूरी तरह से सफल है जिसे फिल्म के जरिए कहने की कोशिश की गई है।
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