गांधीनगर से शाह के उतरने पर पूरे गुजरात में एक माहौल बनाने का मौका- बीजेपी
इस सीट पर आडवाणी बीते तीन दशक से प्रतिनिधित्व करते रहे हैं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक अमित शाह को गांधीनगर भेजकर बीजेपी ने लालकृष्ण आडवाणी की सीट पर उन्हें हटाकर कोई कमजोर व्यक्ति देने की बजाय अपने अध्यक्ष को भेजा है। इससे गांधीनगर सीट पर बड़े नेता के प्रतिनिधित्व करने का इतिहास बना रहेगा। इसके अलावा गुजरात में 2017 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के मजबूत प्रदर्शन को देखते हुए शाह की मौजूदगी पार्टी में ऊर्जा भरने का काम करेगी। गांधीनगर से शाह के उतरने पर पूरे गुजरात में एक माहौल बनाने का मौका मिलेगा।
आडवाणी को इस सीट से न उतरने के लिए मनाने के लिए भी पार्टी को मशक्कत करनी पड़ी। संगठन महामंत्री रामलाल और सीनियर बीजेपी लीडर मुरली मनोहर जोशी ने 91 वर्षीय आडवाणी से मिलकर उन्हें चुनाव मैदान से हटने के लिए मनाने का काम सौंपा गया था। बीजेपी ने आडवाणी के अलावा कई अन्य सीनियर नेताओं को भी चुनाव मैदान से बाहर करने का फैसला लिया है। इनमें शांता कुमार, भगत सिंह कोश्यारी और मुरली मनोहर जोशी जैसे नेता शामिल हैं। अभी मुरली मनोहर जोशी की कानपुर सीट से कैंडिडेट का ऐलान नहीं हुआ है, लेकिन कहा जा रहा है कि वह उम्मीदवारी से हटने पर सहमति जता चुके हैं।

























