देश की अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए अभिजीत बनर्जी ने बताएं उपाए
अर्थशास्त्र के नोबेल से सम्मानित भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिक अभिजीत बनर्जी (Nobel laureate Abhijit Banerjee) ने भारतीय अर्थव्यवस्था (Indian Economy Revival) की रफ्तार बढ़ाने के लिए कई अहम सुझाव दिए हैं | उन्होंने हिंदी अखबार दैनिक भास्कर को दिए इंटरव्यू में बताया - अभिजीत बनर्जी से पूछा गया कि देश की अर्थव्यवस्था कैसे 5 लाख करोड़ डॉलर तक पहुंचेगी तो उन्होंने कहा कि पिछले कुछ समय से आ रहे आंकड़ों से साफ पता चलता है कि देश की आर्थिक विकास दर काफी धीमी हो गई है | लेकिन डिमांड को फिर से बढ़ाया जाता है तो आर्थिक ग्रोथ में रफ्तार लौट सकती है | इसके लिए अब देश के गरीबों को पैसा देना होगा | इससे बाजार में डिमांड बढ़ सकती है | तभी इकोनॉमी का भी आकार बढ़ेगा | अभिजीत बनर्जी कहते हैं कि भारत में कई संस्था गरीबों के लिए काम कर रही हैं | खासकर उधार देकर उन्हें बिजनेस करने के लिए प्रोत्साहित करती हैं |
इस रकम से गरीब अपनी जरूरत का सामान नहीं खरीद सकते हैं | मतलब साफ है कि उन्हें जो पैसा मिलता है वो उससे टीवी, फ्रिज जैसी चीजे नहीं खरीद सकते | बनर्जी का कहना है कि हमें कंपनियों को स्थापित करने के तरीके को आसान बनाना होगा | गीता गोपीनाथ, रघुराम राजन और मिहिर शर्मा के साथ हमारी किताब 'व्हाट इकोनॉमी नीड्स नाउ' में हमने प्लग-इन लोकेशंस बनाने की बात कहीं है, जहां कंपनियां अच्छी कनेक्टिविटी, आसान भूमि अधिग्रहण और शायद आधुनिक श्रम कानूनों से लाभ उठा सकें | मुझे नहीं लगता है कि इस साल के तय किया गया राजकोषीय घाटे का लक्ष्य सरकार हासिल कर पाएगी | जहां तक मुझे समझ आता है कि देश में डिमांड की कमी है | इसी वजह से मैन्युफैक्चरिंग नहीं बढ़ रही है | सरकार की ओर से कम किए गए कॉर्पोरेट टैक्स से डिमांड पाना मुश्किल नजर आता है |


