आज दुनिया भर के लोग गुरु नानक देव जी की 550वीं जयंती अर्थात प्रकाशपर्व को मना रहे
आज गुरु नानक देव जी की 550वीं जयंती अर्थात प्रकाशपर्व है | सिर्फ सिख समाज ही नहीं बल्कि मानवता तथा इंसानियत को मानने वाले दुनिया भर के लोग आज गुरु नानक जी के प्रकाशपर्व को मना रहे हैं, गुरु नानक जी को नमन कर रहे हैं तथा उनके बनाये गये सिद्धांतों, उनके आदर्शों पर चलने की प्रेरणा ले रहे हैं | गुरुनानक देव जी सिखों के प्रथम गुरु थें | नानक जी का जन्म 1469 में कार्तिक पूर्णिमा को पंजाब (पाकिस्तान) क्षेत्र में रावी नदी के किनारे स्थित तलवंडी नाम गांव में हुआ | नानक ने कर्तारपुर नाम का शहर बसाया था जो अब पाकिस्तान में मौजूद है | यही वो स्थान है जहां सन् 1539 को गुरु नानक जी का देहांत हुआ था | इनके पिता का नाम कल्याण या मेहता कालू जी था और माता का नाम तृप्ती देवी था | 16 वर्ष की उम्र में इनका विवाह गुरदासपुर जिले के लाखौकी नाम स्थान की रहने वाली कन्या सुलक्खनी से हुआ | इनके दो पुत्र श्रीचंद और लख्मी चंद थें | दोनों पुत्रों के जन्म के बाद गुरुनानक देवी जी अपने चार साथी मरदाना, लहना, बाला और रामदास के साथ तीर्थयात्रा पर निकल पड़े | ये चारों ओर घूमकर उपदेश देने लगे |

1521 तक इन्होंने तीन यात्राचक्र पूरे किए, जिनमें भारत, अफगानिस्तान, फारस और अरब के मुख्य मुख्य स्थानों का भ्रमण किया | इन यात्राओं को पंजाबी में “उदासियाँ” कहा जाता है | गुरु नानक जी ने अपनी मृत्यु से पहले अपने शिष्य भाई लहना को अपना उत्तराधिकारी बनाया, जो बाद में गुरु अंगद देव नाम से जाने गए | श्री गुरु नानक देव जी ने दुनिया को ‘नाम जपो, किरत करो, वंड छको’ का संदेश देकर समाज में भाईचारक सांझ को मजबूत किया और एक नए युग की शुरुआत की | सामाजिक कुरीतियों का विरोध करके उन्होंने समाज को नई सोच और दिशा दी | गुरु जी ने ही समाज में व्याप्त ऊंच-नीच की बुराई को खत्म करने और भाईचारक सांंझ के प्रतीक के रूप में सबसे पहले लंगर की शुरुआत की | गुरु नानक देव जी ने अपना पूरा जीवन मानवता की सेवा में लगा दिया | उन्होंने सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि अफगानिस्तान, ईरान और अरब देशों में भी जाकर लोगों को धर्म की शिक्षा दी |

प्रकाशपर्व के दिन जहां गुरुद्वारों में भव्य सजावट की जाती है, अखंड पाठ साहिब के भोग डालेे जाते हैं और लंगर बरताए जाते हैं | प्रकाश पर्व से पहले प्रभातफेरियों निकालकर गुरु जी के आगमन पर्व की तैयारियां शुरू कर दी जाती हैं | संगत सतनाम श्री वाहेगुरु और बाणी का जाप करते हुए चलती है | शहरों में भव्य नगर कीर्तन निकाले जाते हैं | सभी जत्थों का जगह-जगह पर भव्य स्वागत किया जाता है | धार्मिक दीवान सजाए जाते हैं और शबद कीर्तन किया जाता है | गुरुद्वारों में दिन रात धार्मिक कार्यक्रम जारी रहते हैं | गुरु नानक देव ने अपने ओजस्वी और भक्तिपूर्ण विचारों के दम पर वह मुकाम हासिल किया जिसे राजा महाराजा भी अपनी पूरी सेना के साथ नहीं हासिल कर पाते | वह दुनिया के लिए एक ऐसे महान विचारक थे, जिनके विचार कई सदियों तक लोगों को प्रेरित और मार्गदर्शन करते रहेंगे | गुरु नानक की शिक्षाएं और विचार आज भी सांसारिक जीवन में भटके हुए लोगों को राह दिखाने का काम करते हैं |






