जब लिखेंगे.....फ़िर मुस्कुरायेंगे!!
Medhaj News 28 Jun 19,21:42:32 Special Story
खामोशियों को समेट कर,
हम एक किताब बनायेंगे,
जो नहीं कहा है लफ्जों में,
वो कागजों में सजायेंगे;
कुछ यादें, कुछ वादें,
कुछ प्यार भरी नादानियाँ;
जब लिखेंगे, तब फ़िर जियेंगे
और मुस्कुरायेंगे।
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कुछ राज दिल के गहरे,
वो न भूलने वाले चेहरे;
वो बोलती निगाहें,
मेरे लिए फैली हुई वो बाहें;
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सिर्फ रास्तें थें, तब मंजिल का-
सोचता ही था कौन?
तब बिना बोले ही,
सब कह जाता था मेरा मौन;
एक बार फिर उन पलों में,
वापस हम जायेंगे;
जब लिखेंगे, तब फ़िर जियेंगे
और मुस्कुरायेंगे।
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शायद यही है ऐसा,
जो साथ रहेगा हमेशा,
तो इस अकेलेपन से,
अब दूर भागना कैसा?
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हम एक किताब बनायेंगे,
जो नहीं कहा है लफ्जों में,
वो कागजों में सजायेंगे;
कुछ नगमें, कुछ नज्में,
कुछ किस्से-कहानियाँ;
कुछ पल वो रूहानी से,
कुछ जीवन की वीरानियाँ;कुछ यादें, कुछ वादें,
कुछ प्यार भरी नादानियाँ;
जब लिखेंगे, तब फ़िर जियेंगे
और मुस्कुरायेंगे।
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कुछ अपने, कुछ सपनें,
कुछ बातें अनकहीं सी;
वो पल थे सुनहरे,
जब न मुलाकातें थम रही थीं;कुछ राज दिल के गहरे,
वो न भूलने वाले चेहरे;
वो बोलती निगाहें,
मेरे लिए फैली हुई वो बाहें;
एक बार फिर से,
हमारी नज़्मों में आएंगे;
जब लिखेंगे, तब फ़िर जियेंगे
और मुस्कुरायेंगे।☆☆☆☆☆
सिर्फ रास्तें थें, तब मंजिल का-
सोचता ही था कौन?
तब बिना बोले ही,
सब कह जाता था मेरा मौन;
जब रात-दिन की परवाह,
होती किसे थी जानी;
बस अल्हड़पन था मुझमें और,
बच्चों सी थी मनमानी;एक बार फिर उन पलों में,
वापस हम जायेंगे;
जब लिखेंगे, तब फ़िर जियेंगे
और मुस्कुरायेंगे।
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न ख्वाहिशें हैं ज्यादा,
न अब बंदिशों की दीवार है;
फिर न जाने क्यों मुझे,
इस अकेलेपन से अब प्यार है;शायद यही है ऐसा,
जो साथ रहेगा हमेशा,
तो इस अकेलेपन से,
अब दूर भागना कैसा?
खामोशियों और कलम को,
हम अपना साथी बनायेंगे;
जब लिखेंगे, तब फ़िर जियेंगे
और मुस्कुरायेंगे।☆☆☆☆☆
----(भावना मौर्या)----













