Headline

SBI ग्राहक ध्यान दें! इस नई सर्विस से आपकी जिंदगी हो जाएगी आसान

Medhaj News 10 May 19 , 06:01:39 Business & Economy
sbi_bank.jpg

हम अपने बैंक अकाउंट से आम तौर पर उसमें मौजूद बैलेंस के मुताबिक ही विदड्रॉल कर सकते हैं | लेकिन कैसा हो अगर आप जरूरत पड़ने पर अकाउंट से बैलेंस से ज्यादा विदड्रॉ कर सकें | जी हां, ऐसा संभव है ओवरड्राफ्ट फैसिलिटी की बदौलत | देश की सबसे बड़े सरकारी बैंक SBI का कहना है कि बैंक ने 1 लाख रुपये से ज्यादा के कैश क्रेडिट / ओवर ड्राफ्ट रेट्स को रेपो रेट से लिंक कर दिया है | ताकि कस्टमर्स को रेपो रेट में कटौती का फायदा जल्द मिल सके |  RBI ने रेपो रेट में 4 अप्रैल को 0.25 फीसदी की कटौती की है और इसका पूरा लाभ SBI के 1 लाख रुपये से ज्यादा के CC/OD कस्टमर्स को 1 मई 2019 से मिलना शुरू हो गया है | आइए जानें क्या होता है ओवरड्राफ्ट फैसिलिटी... ओवरड्राफ्ट एक तरह का लोन होता है | इसके चलते कस्टमर्स अपने बैंक अकाउंट से मौजूदा बैलेंस से ज्यादा पैसे विदड्रॉ कर सकते हैं | इस अतिरिक्त पैसे को एक निश्चित अवधि के अंदर चुकाना होता है और इस पर ब्याज भी लगता है | ब्याज डेली बेसिस पर कैलकुलेट होता है | ओवरड्राफ्ट फैसिलिटी कोई भी बैंक या नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी दे सकती है | आपको मिलने वाले ओवरड्राफ्ट की लिमिट क्या रहेगी, यह बैंक या NBFCs तय करते हैं |





बैंक अपने कुछ ग्राहकों को प्रीअप्रूव्ड ओवरड्राफ्ट फैसिलिटी देते हैं | वहीं कुछ कस्टमर्स को इसके लिए अलग से मंजूरी लेनी होती है | इसके लिए लिखित में या इंटरनेट बैंकिंग के जरिए अप्लाई करना होता है | कुछ बैंक इस सुविधा के लिए प्रोसेसिंग फीस भी वसूलते हैं | ओवरड्राफ्ट दो तरह के होते हैं-एक सिक्योर्ड, दूसरे अनसिक्योर्ड | सिक्योर्ड ओवरड्राफ्ट वह है, जिसके लिए सिक्योरिटी के तौर पर कुछ गिरवी रखा जाता है | आप एफडी, शेयर्स, घर, सैलरी, इंश्योरेंस पॉलिसी, बॉन्ड्स आदि जैसे चीजों पर ओवरड्राफ्ट हासिल कर सकते हैं | इसे आसान भाषा में एफडी या शेयर्स पर लोन लेना भी कहते हैं | ऐसा करने पर ये चीजें एक तरह से बैंक या NBFCs के पास ​गिरवी रहती हैं | अगर आपके पास कुछ भी सिक्योरिटी के तौर पर देने के लिए नहीं है तो भी आप ओवरड्राफ्ट फैसिलिटी ले सकते हैं | इसे अनसिक्योर्ड ओवरड्राफ्ट कहते हैं | उदाहरण के तौर पर क्रेडिट कार्ड से विदड्रॉल | जब आप लोन लेते हैं तो उसे चुकाने के लिए एक अवधि तय होती है | अगर कोई लोन को अवधि से पहले चुका दे तो उसे प्रीपेमेंट चार्ज देना होता है लेकिन ओवरड्राफ्ट के साथ ऐसा नहीं है | आप तय अवधि से पहले भी बिना कोई चार्ज दिए पैसे चुका सकते हैं | साथ इस पर ब्याज भी केवल उतने ही वक्त का देना होता है, जितने वक्त तक ओवरड्राफ्टेड अमाउंट आपके पास रहा | इसके अलावा आपको EMI में पैसे चुकाने की भी बाध्यता नहीं है | आप तय अवधि के अंदर कभी भी पैसे चुका सकते हैं | इन चीजों के चलते यह लोन लेने से ज्यादा सस्ता और आसान है | अगर आप ओवरड्राफ्ट नहीं चुका पाते हैं तो आपके द्वारा गिरवी रखी गई चीजों से इसकी भरपाई होगी |  लेकिन अगर ओवरड्राफ्टेड अमाउंट गिरवी रखी गई चीजों की वैल्यु से ज्यादा है तो बाकी के पैसे आपको चुकाने होंगे |


    Comments

    Leave a comment


    Similar Post You May Like