सर्वोच्च न्यायालय से राहत नही-गिरफ्तार हो सकते है चिदंबरम
पी चिदंबरम पूर्व गृह और वित्त मंत्री आज अपने घर नही है घर पर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो का नोटिस लगा है 2 घंटे में हाज़िर हो। आखिर ऐसा क्यों है इनका अपराध क्या है। आपने चर्चित INX मीडिया मनी लॉन्ड्रिंग केस में फसे इंद्राणी मुखर्जी और पीटर मुखर्जी जो अपनी बेटी के मर्डर में भी आरोपी है ये दोनों मनी लॉन्ड्रिंग में फंसे है। इंद्राणी ने बयान दिया है कि कि विदेशो से आने वाले 305 करोड़ के लिए फॉरेन इन्वेस्टमेंट प्रमोशन बोर्ड के क्लीयरेंस की जरूरत थी जबकि वो 4.62 करोड़ ही इन्वेस्ट की परमिशन थी, 305 करोड़ की परमिशन चिदंबरम को करनी थी जिसके एवज में उन्होंने अपने पुत्र की कंपनी में पैसा लगाने को कहा था और लगाया भी। इंद्राणी के सरकारी गवाह बनने पर चिदंबरम जी कि मुश्किल बढ़ती जा रही है। दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने अपने 24 पेज के फैसले में उन्हें अग्रिम जमानत देने से मना कर दिया है | कोर्ट के आदेश में कहा गया कि मनी लॉन्ड्रिंग का यह एक पहले दर्जे का मामला है | याचिकाकर्ता पर लगे आरोप गंभीर हैं | कोर्ट के सवालों के साफ-साफ जवाब नहीं मिलने को प्रमुख कारक मानते हुए अग्रिम जमानत देने से मना कर दिया गया |
हाई कोर्ट का ये आदेश पूर्व वित्त मंत्री और पूरी पार्टी के लिए बड़े झटके की तरह है | कोर्ट के मुताबिक प्रभावी जांच के लिए उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ करने की जरूरत है | चिदंबरम की तरफ से कानूनी विशेषज्ञों की टीम सुप्रीम कोर्ट पहुंची पर उन्हें राहत नहीं मिली | वहीं दूसरी तरफ सीबीआई और ईडी की टीम भी उनसे पूछताछ को उनके घर पर पहुंची, लेकिन अधिकारियों को चिदंबरम की अनुपस्थिति में खाली हाथ ही लौटना पड़ा | वही जस्टिस सुनील गौड़ ने चिदंबरम की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि ऐसे मामलों में जमानत देने से समाज में गलत मैसेज जाएगा | उन्होंने इस बात का भी जिक्र किया कि जब चिदंबरम को कोर्ट से राहत मिली हुई थी, उस समय उन्होंने पूछताछ में जांच एजेंसियों को इस मामले को लेकर साफ-साफ क्यों नहीं बताया |





