जगन्नाथ मिश्रा नहीं रहे, प्रोफेसर से बने बिहार मुख्यामंत्री
बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री डॉक्टर जगन्नाथ मिश्र का निधन हो गया। लंबे समय से जगन्नाथ मिश्र बीमार चल रहे थे। उनका निधन दिल्ली स्थित आवास पर हुआ। पूर्व सीएम जगन्नाथ मिश्रा के निधन पर सीएम नीतीश कुमार ने शोक प्रकट किया है। सीएम ने जगन्नाथ मिश्र के निधन को बिहार की राजनीति के लिए बड़ा क्षति बताया है। वहीं उन्होंने बिहार में तीन दिनों के राजकीय शोक का एलान किया है। उन्होंने कहा है कि श्री मिश्रा ने अपने राजनीतिक सफर के दौरान बिहार के विकास के लिए काफी कुछ किया था। बिहार उनके किए गए कामो को हमेशा याद रखेगा। जगन्नाथ मिश्रा (Jagannath Mishra) का राजनीतिक सफर बेहद दिलचस्प है। वह 3 बार बिहार के मुख्यमंत्री रह चुके थे। मिश्रा पहली बार 1975 में बिहार के मुख्यमंत्री बने. जिसके बाद दूसरी बार उन्होंने 1980 में मुख्यमंत्री पद ग्रहण किया. जबकि तीसरी बार मिश्रा 1989 में तीन महीने के लिए सीएम रहे। प्रोफेसर के रूप में अपना करियर शुरू करने वाले जगन्नाथ मिश्रा बिहार विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र पढ़ाते थे। राजनीति में उनकी खास रुचि थी क्योंकि उनके बड़े भाई, ललित नारायण मिश्र राजनीति में थे। वह 90 के दशक के बीच केंद्रीय कैबिनेट मंत्री भी रहे। बिहार में डॉ मिश्रा का नाम बड़े नेताओं के तौर पर जाना जाता है। कांग्रेस छोड़ने के बाद, वह राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गए थे। बिहार के सुपौल के बलुआ में 1937 में जन्में जगन्नाथ मिश्रा अपने समय में कांग्रेस के कद्दावर नेताओं में शुमार रहे। बिहार में कांग्रेस को ऊंचाइयों तक ले जाने में उनका योगदान अहम रहा। हालांकि बाद में जेडीयू से जुड़ गये। उनके जीवन के सबसे संघर्षपूर्ण 1995 के बाद के रहे जब 950 करोड़ रुपये के चारा घोटाले में उनका नाम आया।पिछले ही साल जनवरी 2018 में चारा घोटाले से जुड़े चाईबासा कोषागार (आरसी 68 ए/96) से अवैध निकासी के मामले जगन्नाथ मिश्र को अदालत ने दोषी करार देते हुए पांच साल की सश्रम कैद की सजा भी सुनाई गई थी।




