जल संरक्षण की अपनी प्राचीन पद्धतियों की खोज करनी होगी : उमा भारती

18-9-2014 5.50PM IST


Medhaj News: केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्री ने कहा है कि वे पश्चिम बंगाल, असम, बिहार और उत्तोर प्रदेश के आरसेनिक से बहुत अधिक प्रभावित जिलों में मंत्रालय की टीम के साथ स्वायं वहां जाकर आरसेनिक के कारणों का पता लगाएंगी और उसके निदान की व्यंवस्थाी करेंगी। आज यहां भारत में सुरक्षित और सतत जल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए प्राकृतिक जल संशोधन उपायों पर आयोजित एक अंतर्राष्ट्री य सम्मेरलन का उद्घाटन करते हुए भारती ने यह जानकारी दी। उन्होंयने बताया कि देश के 86 जिले आरसेनिक और 282 जिले फ्लोराइड से प्रभावित है।

इस अवसर पर उन्होंेने कहा कि दुनियाभर में गिरता हुआ जलस्तिर चिंता का विषय है। ने उम्मीपद जताई कि इस सम्मेंलन में आये दुनियाभर के विशेषज्ञ विचार विमर्श के बाद किसी ऐसे निष्कहर्ष पर पहुंचेगे जिसका लाभ सभी देशों को मिल सकेगा।

उमा भारती ने कहा कि भारत समेत पूरी दुनिया में आज जल संरक्षण चिंता का प्रमुख विषय है। उन्होंतने कहा कि जल संरक्षण की अपनी प्राचीन पद्धतियों की हमें फिर से खोज करनी होगी क्योंंकि यह पद्धतियां सदियों से हमारे यहां जलस्त्र बनाये रखने में मददगार रही है। के अनुसार ''जरूरत इस बात की है कि हम इन प्राचीन पद्धतियों के साथ-साथ नई तकनीक का भी तालमेल बैठाए ताकि जलसंरक्षण का हमारा पावन उद्देश्य् पूरा हो सके''। गुजरात के जल संरक्षण के सफल प्रयोग का उल्लेरख करते हुए ने कहा है कि इसे देश के अन्यस भागों में लागू किए जाने पर भी विचार होना चाहिए।

सुश्री भारती ने कहा कि हमें यह देखना है कि हम नदियों के सहयोगी बने और यह भी देखना है कि नदियां हमारी सहयोगी कैसे बने। नदियों के साथ-साथ हिमालय की बर्फीली चोटियों में भी बढ़ रहे प्रदूषण पर चिंता व्यैक्तय करते हुए उन्होंिने कहा कि ग्ले शियर सिकुड़ रहे है जिसका हमें निराकरण करना होगा।

केन्द्रीय जल संसाधन मंत्री ने कहा कि नदी सरंक्षण मामलों में हमें यूरोप से बहुत कुछ सीखना है। विशेषकर उनके पारंपरिक उपायों से जो उनकी संस्कृसति का भी हिस्साे बन गए है।

नदियों के पानी को स्वपच्छ बनाये रखने के लिए उनके आसपास कांस वनस्पाति को बड़े पैमाने पर लगाये जाने की आवश्य्कता का उल्ले ख करते हुए ने कहा कि इससे नदियों का पानी स्व च्छ और निर्मल बना रहेगा। मंत्री महोदया ने कहा कि हम नंदन वन से गंगा सागर तक गंगा को वनस्पदति को हरी साड़ी पहनायेंगे।

रेगिस्ताानी इलाकों में जल संरक्षण के पारंपरिक तरीकों का उल्लेंख करते हुए मंत्री महोदया ने राजस्थान के जैसलमेर जिले में अपनायी जा रही तकनीक का विशेष रूप से उल्लेलख किया और कहा कि पानी की कमी वाले देश के अन्यअ क्षेत्रों में इसे सफलतापूर्वक अपनाया जा सकता है। पर्वतीय क्षेत्रों में अपनायी जाने वाली पारंपरिक जल संरक्षण की ''चाल और खाल'' पद्धति का उल्लेीख करते हुए कहा कि इसे बड़े पैमाने पर अपनाने से पहाड़ों में जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।

समारोह के इतर सर्वोच्च न्यावयालय की हाल की टिप्पसणी का उल्लेसख करते हुए सुश्री भारती ने उसे अपने मंत्रालय के हित में बताया। उन्होंयने कहा कि ''हमें तो सम्माषन और संरक्षण मिला है। हमें कोई दिक्कहत आयेगी तो माननीय सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वह हमारा सहयोग करेगा। हमें कोर्ट से सहारा मिला है और हमारा आत्म विश्वारस बढ़ा है। मैं माननीय कोर्ट की आभारी हूं कि उसने हमारा हौसला और आत्मरविश्वा स बढ़ाया है। गंगा को बचाने में जहां कहीं भी कठिनाईयां आयेगी तो माननीय न्याआयालय ने कहा है कि हम भी आपका सहयोग करेंगे''।