जीवन के प्रति कुछ संवेदनाएँ

Medhaj News 4 Jan 19,03:45:28 Special Story
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जीवन के भागम-भाग में,



कुछ वक्त बचाना मुश्किल है।



दुनियादारी के चक्कर में, अपनों संग



फुर्सत के पल बिताना मुश्किल है।



 



आगे बढ़ने की दौड़ में सब अपनों को ही भूल रहे,



हमको पोषित करने हेतु जिन्होंने कितने शूल सहे।



सिर्फ अपने स्वार्थ का ही सोचे, क्या हम इतने कम-दिल हैं?



थोड़ा वक्त उन्हें भी दे दे, हमारे प्यार के जो काबिल हैं।



 



दुनिया में बढ़ती नफरत से रिश्तों की डोरी टूट रही,



इस दूषित वातावरण से, हमारी सृष्टि भी हमसे रूठ रही।



दूसरा कोई और नहीं, हम खुद ही अपने कातिल है,



तृष्णा से दम है घुटता, जबकि पास में जल ही जल है। 



 



धन-दौलत के लिए न जाने कितने कत्ले-आम हुए,



कुछ झूठे लोगों के कारण सच्चे भी बदनाम हुए।



मतलब-परस्त इस दुनिया में न जाने कितने सन्दिल है,



दौलत कमाना तो आसान है, विश्वास कमाना मुश्किल है।



 



रिश्तों के बांधे रखने के लिए, बस दो मीठे बोल काफी हैं,



इनकी मर्यादा टूटे तो नहीं उसकी कोई माफी है।



दौलत से भरे खाली घर में नहीं होता कुद्द भी हासिल है,



चलते-चलते पग हैं दुखते, पर दूर अभी मेरी मंजिल है............



............पर दूर अभी मेरी मंजिल है।



----भावना मौर्य----


    Comments

    • Medhaj News
      Updated - 2019-05-10 23:16:52
      Commented by :Baikunthbihari

      Nice sir kuch pall apne cahane walo keliye Dena chayae


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