यू पी में बेदम “मैजिक मोदी", राजस्थान में तीन बटा चार की हार

16-9-2014 7.00PM IST


Medhaj News: लोकसभा चुनावों में देश भर से मिले जनमत का दावा करने वाली बीजेपी के दावे हवा में बिखरते नजर आ रहे है | देश के 10 राज्यों की तीन लोकसभा सीटो पर भाजपा का प्रदर्शन पार्टी के लिए उत्साह जनक नहीं रहा| उपचुनाव के परिणामों में यूपी और राजस्थान में करारी हार मिली है |

गुजरात और पश्चिम बंगाल के परिणामो में पार्टी चाहे तो कुछ संतोष कर सकती है | यूपी की 11 सीटों में समाजवादी पार्टी को 8 सीटें जीती हैं| बीजेपी ने तीन सीटों पर जीत हासिल की है | राजस्थान में चार में से तीन सीटें कांग्रेस को और एक भाजपा को हासिल हुई |

उत्तर प्रदेश : बेदम हुआ मोदी मैजिक

अगर नतीजों को आधार मानें तो कहा जा सकता है कि उत्तर प्रदेश में ' मोदी मैजिक' और भाजपा के तथाकथित लहर के दावे बेदम हो चले | भाजपा को भारी झटका देकर सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी ने 11 में से 8 विधानसभा पर जीत दर्ज की |साथ ही मैनपुरी लोकसभा सीट पर सपा का कब्जा बरकरार रहा | भाजपा का सहारनपुर नगर, लखनऊ पूर्व और नोएडा सीट पर जीत दर्ज करने में कामयाब रही |

समाजवादी पार्टी ने बिजनौर, ठाकुरद्वारा, निघासन, हमीरपुर, चरखारी, सिराथू , बलहा और रोहनिया सीट पर जीत दर्ज की , बसपा की गैरमौजूदगी में सपा और कांग्रेस ने सभी 11 सीटों पर मुकाबले में दाँव लगाया था | भाजपा ने 10 सीटों पर प्रत्याशी उतारे और भाजपा की सहयोगी अपना दल ने रोहनिया सीट से प्रत्याशी उतारा था |

गौरतलब है हाल ही में संपन्न लोकसभा चुनावों में भाजपा और अपना उसकी सहयोगी दल ने जबर्दस्त प्रदर्शन करते हुए 80 में से 73 सीटों पर जीत दर्ज की थी | सपा केवल पांच और कांग्रेस दो सीटों पर सिमट के रह गई थी | बसपा का खाता तक नहीं खुल पाया था |ऐसे में भाजपा की करारी हार को उसकी जीत के जैसा ही आश्चर्यजनक माना जा रहा है.

यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस जीत को साम्प्रदायिक शक्तियों के ऊपर जीत करार दिया है.

राजस्थान : तीन बटा चार के जनादेश से कांग्रेस को संजीवनी !

राजस्थान के उपचुनाव में घोषित नतीजो में भाजपा को करारा झटका लगा है | कुल चार सीटो में से कांग्रेस ने तीन सीटें जीत ली है | इस अप्रत्याशित परिणामो में सुना जा रहा है कि राजस्थान की महारानी का जादू फीका पड़ रहा है | प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट ने जीत का श्रेय संगठन के सभी कार्यकर्ताओं को दिया है |

सचिन पायलट ने कहा कि " प्रजातंत्र में जनता सबक सिखाना जानती है और भाजपा सरकार के झूठे वादों के खिलाफ अपना जबाब दिया है | भाजपा दोहरी जबान बोलती है | भाजपा ने भावनाए भड़काकर जनता को भरमाने के प्रयासों को इस जनादेश में नकार दिया गया है | ये जनता की जीत है |

जीत से उत्साहित पूर्व मंत्री और राजस्थान प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट ने कहा "हम पूरे जोश से संगठन को दोबारा खड़ा करेंगे | नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों के लिए हम पूरे जोश से काम करने के लिए तैयार हैं "|

सचिन पायलट के बयान से जाहिर है कि इस जीत ने संगठन के लिए संजीवनी का काम किया है |

गुजरात मै कांग्रेस का अप्रत्याशित प्रदशर्न मोदी के माथे पर बल डालने वाला है | गुजरात की व विधानसभा सीटों में से कांग्रेस ने एक तिहाई आपने नाम की है |

यूपी में हार के मायने :

यूपी उपचुनाव में भाजपा की दुर्गति का कारण रहा भाजपा का सांप्रदायिक कार्ड। इसी के चलते सपा को फायदा मिला। नतीजों की मानें तो भाजपा का वोटबैंक सीमित शहरी क्षेत्रों तक सीमित होकर रह गया। शहरी क्षेत्रो में जीत दर्ज करने का अर्थ पार्टी की नीतियों के आलोचक पार्टी की प्राथमिकता से लगा रहे है | कुर्मी वोट के बल पर जीतने की उम्मीद लगाये बैठी भाजपा सिराथू, बेलहा, और रोहनिया के जिन क्षेत्रों में सपा को जीत मिली है उनमे मुस्लिम ब्राह्मण समीकरणों के चलते सांप्रदायिक उन्माद हावी न हो सका. राजनैतिक पंडितों द्वारा मायावती और बसपा की गैरहाजिरी में भाजपा के पक्ष में दलित वोटों के ध्रुवीकरण के कयास भी लगाये जा रहे थे.

नतीजे गवाह हैं कि ऐसा हो न सका ! रोहनिया विधान सभा में सहयोगी पार्टी की प्रत्याशी का हारना मोदी के चुनाव क्षेत्र में सेंधमारी जैसा ही माना जा रहा हैं. यहाँ पर भाजपा के सहयोगी अपना दल की राष्ट्रीय अध्यक्ष कृष्णा पटेल चुनाव में उतरी। इस सीट को लोकसभा जीतने के बाद अनुप्रिया पटेल ने खाली किया था. पार्टी सूत्रों के मुताबिक हार का कारण पार्टी की अंदरुनी कलह और अति आत्म विश्वास माना जा रहा है. अनुप्रिया पटेल की विधायक निधि से काम करवाने की बजाये वापस करने का मुद्दा सत्तारूढ़ विरोधी दल ने जम कर भुनाया।

बनारस के साथ लगी रोहनिया विधान सभा में मोदी की लोकसभा का एक बड़ा भाग लगता है ऐसे में इस सीट से अपना दल के हारने को जनता के साम्प्रदायिक ताकतों को नकारने के तौर पर देखा जा रहा है. चुनावों में लव जेहाद का मुद्दा उछाल कर भाजपा सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के प्रयास में यूपी के साथ -साथ राजस्थान और गुजरात में भी न चल सके . गौरतलब है कि कि इस बार योगी आदित्य नाथ पर इसी सिलसिले में एक ऍफ़ आई आर भी दर्ज हुई थी. साथ ही साक्षी महाराज ने लव जेहाद के खुले बाजार में रेट भी बताये थे. हालांकि मुज़फ्फरनगर मामले को अजीत सिंह और मायावती ने लोकसभा चुनावों में ध्रुवीकरण के लिए सपा और भाजपा की मिलीभगत करार दिया था. पर ऐसे में उपचुनावों में जीत को मुख्यमंत्री द्वारा उन्मादी, साम्प्रदायिक विभाजनकारी शक्तियों के पराजय के तौर पर स्वीकार करना कम महत्वपूर्ण नहीं।