“लव जिहाद” पर बंट रहे हैं टॉप कॉप!

22-9-2014 11.45AM IST
Medhaj News: लव जिहाद महज हिंदुत्व के प्रचारकों तक नहीं रही, इसकी तपिश का एक सिरा देश के सीनियर पुलिस अधिकारियों तक पहुच चूका है. इसका सबब है वैश्विक इस्लामिक आतंकवाद के रूप में प्रचार पाया लव जिहाद जिसमे हिन्दू महिलाओं को बहका के उनका धर्मान्तरण करवाना मुख्य षड़यंत्र है.

इन्टरनेट की वेबसाईट याहू के टॉपकॉप नाम के फोरम में भारतीय पुलिस सेवा के अधिकरियों के बीच छिड़ी बहस को नफरतों तक पहुँचने के दौरान छोड़ना पड़ा. बहस में कुछ सदस्यों ने मुसलामानों और इस्लाम की घनघोर निंदा भी की.

सेवारत और रिटायर्ड आई पी एस अफसरों के किसी सदस्य ने जिसने इस को निराशाजनक और चेतावनी के रूप में लेते हुए इस समूह में अख़बार द हिन्दू को मान्यता दिलाई उसमें आमंत्रित किया.

अधिकारी ने द हिन्दू को बताया कि चौंकाने वाले बात ये है कि हमारी जानकारी हमारे अन्दर पूर्वाग्रह पैदा कर रही है. आई पी एस अधिकारियों के बीच जिस निर्लज्जता के साथ उससे एक नया आयाम नज़र आता है.

फोरम में १९६५ बैच के एक अधिकारी ने लिखा है “लव जिहाद सच्चाई है, हिन्दू लड़कियाँ मुसलमान लड़कों से शादियाँ कर रही हैं. ये रास्ता दो तरफ़ा नहीं है. इसको सेक्युलर धारा कहा जाना चाहिए”.

२००३ बैच के अधिकारी और उत्तर प्रदेश में २ साल तैनात रहे दुसरे अधिकारी लिखते हैं कि लव जिहाद वास्तविकता है और एक संगठित अपराध है.

यद्यपि लव जिहाद के समर्थक उनके आरोपों के आंकड़े मांगे जाने पर नज़र अंदाज़ कर देते हैं लेकिन कुछ अफसर इसे ख़ारिज भी करते हैं, १९९६ बैच के एक अफसर डांटते हुए कहते हैं कि कहते हैं, “ये “हमारे और उनके” का क्या मतलब है? उम्मीद है कि आपको सर्विस में आने के साथ ली गयी शपथ याद होगी.”

लव जेहाद के कुछ समर्थक भी टॉपकॉप के मॉडरेटर जो कि एक रिटायर्ड आई ए एस अफसर हैं, बहस के मायने बताते हुए कहते हैं, “ये गहरी भावनाएं इतनी गहरी हैं कि इनकी वजह से कड़वाहट बढ़ सकती है इसलिए मेरा निवेदन है कि इस विषय को हम यहीं पर ख़त्म करके आगे बढ़ें”.

कुछ अधिकारियों ने इसे संघ परिवार से जोड़ के बताया है तो कुछ ने उस पर सवाल भी उठाये हैं.

1990 बैच के एक अधिकारी ने 49 जिहादी आताकियों का इंटरव्यू किया उसे इस आरोप के समर्थन में कोई सबूत नहीं मिले. वो कहते हैं ” ये किसी इस्लामी सिद्धांत, आदर्श या मुद्दे का हिस्सा नहीं. असलियत में ये अति शुद्धतावादी दृष्टिकोण के विचार हैं जिनमे झुकाव होने से ऐसे वीभत्स ख्याल पैदा होते हैं”.

पश्चिम बंगाल के एक दूसरे अधिकारी लिखते हैं: ” अगर एक बड़ी संख्यां में हिन्दू लड़कियाँ मुस्लिम लड़कों से शादी कर भी रही हैं तो समुदाय और पुलिस को क्या दिक्कत हो सकती है. हर वयस्क का अधिकार है कि शादी और प्रेम के मामले में वह अपने विवेक से कम ले”.

१९८६ बैच के तेलंगाना अफसर कहते हैं कि किसी का धर्मान्तरण करना उसके साथी के लिए जन्नत के जुगाड़ करने जैसा हो सकता है, हो सकता है कि उसमे कोई बुरी नीयत हो ही नहीं.

मुसलमान लड़कों से शादी करने का विरोध सिर्फ हिंदुत्व वालों का मामला नहीं है इसको समझाते हुए अपने अनुभव को साझा करते हुए बंगाल कैडर के एक अधिकारी ने लिखा है,”जब मै एस पी था तो एक मंत्री की रिश्तेदार लड़की एक मुस्लिम के प्यार में पड़ गयी. उसने इस्लामी तरीके से शादी करने के लिए अपना धर्म बदल लिया. उस समय मंत्री की सारी प्रगतिवादी सोच धरी की धरी रह गयी और उसने उस लड़के और उसके पिता को गिरफ्तार करने के लिए मुझ पर दबाव बनाना शुरू किया. जब मैंने इससे इनकार किया तो पुलिस उप महानिरीक्षक ने मुझसे परिणामों को भुगतने की धमकी दी”.