करवा चौथ: पूजन विधि और कब दिखेगा चाँद जानें
इकीसवीं सदी में बिखरते पारिवारिक रिश्ते, आहत होती भावनाएं और पति/पत्नी के मध्य घटते विश्वास को मजबूती प्रदान करनेवाला पर्व ‘गणेश चतुर्थी’ ‘करवा चौथ’ का व्रत 27 अक्तूबर को मनाया जाएगा। द्वापर युग से लेकर आज कलियुग के पांच हजार एक सौ उन्नीस वर्ष व्यतीत होने पर भी यह पर्व उतनी ही आस्था के साथ मनाया जाता है जैसा द्वापर युग में मनाया जाता था।करवा चौथ पर महिलाएं पूरे दिन व्रत रखती हैं और रात को चांद देखकर उसे अर्घ्य देकर व्रत खोलती हैं। करवा चौथ मुहूर्त करवा चौथ पूजा मुहूर्त: 5:40 से 6:47 तक करवा दिल्ली में करवाचौथ पर चंद्रमा का उदय रात 07 बजकर 58 मिनट पर होगा। इस समय करवा चौथ पूजन, कथा पाठ किया जा सकता है।
इस दिन सोने, चांदी अथवा मिट्टी के करवे से पूजा की जाती है। करवा चौथ पर परिवार और आस-पड़ोस की महिलाएं एक साथ पूजा करती हैं। इस दौरान वे एक-दूसरे के साथ करवे का आदान-प्रदान करते हुए मंगल गीत गाती हैं और मां गौरी और गणपति से सौभाग्य देने की कामना करती हैं। पूजा के बाद चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है। फिर महिलाएं परिवार के बड़े-बुजुर्गों से आशीर्वाद लेती हैं।
दिन घर में शांति और सौहार्द का वातावरण बनाए रखना चाहिए। पारिवारिक कलह और द्वेष से बचें। पति-पत्नी को आपसी मनमुटाव से खासतौर पर बचना चाहिए। मान्यता है कि यदि पति-पत्नी इस तिथि में झगड़ते हैं तो पूरे साल ऐसी परिस्थितियां बनती रहती हैं जिनसे आपस में मनमुटाव होता रहता है।
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