अथ श्री क्लीवेज कथा : मंगरु चाहे क्लीवेज देखे

भोजपुरी में व्यंग

24-9-2014 10.38PM


Medhaj News: मंगरु चाहे क्लीवेज देखे।

भैया जी हमहू देखब,

का देखब रे,चुप,इ सब बडकन के देखे के चीज हे।

न भईया जी हमहू देखब सुनली हे बड़ा दंगा फसाद हो गईले हे। कौनो खबरिया वाला फोटुक सोटूक छाप देलके अउ उ कलिवेजवा वाला मैडमा खिसिया गईले।

केकरो फोटुक छाप देभी त न खिसिअइते,औरत के इज्जत न हइ, उ काउनो समान हइ।

खीचइलके हल काहे ला,देखाही ला न बाबू ।

हा बेटा तोरा खाली किलिवेजवे लउकले

,त जे मन होते उहे न देखबे बाबू। हम कउनो पागल ही की चिकन टंगवा न देख के उ बैगवा देख बे। बाबू जे हमरा निक लगले हम देखली, उनका से पूछ के देखती हल ? उहो त किलिवेजवे देखा रहलतून हल। औरत के इज्जत करे चाहि बेटा मंगरू। ओकरो इज्जत है, ओकरा समान नै समझे चाही बेटा। बाबू के बात ? उ जे हमनि के फसा के सबुनवा बेच दे हे से? हमहू ले ले ही, मैडम़ा के गोर गोर टंगवे देख के न बाबू। केता लुटलके बाबू । पचासो साबुन लगे के बादो हमर झमनिया के टंगवा करिए हइ। बाबू तू न जाना ह , इ फिरू कुछ बेचे के चक्कर में हइ ,बाकी एकर किलिवेजवा एकबार देखा देहु न बाबू।

चुप। चल जइब जेल बेटा। औरतियन के एगो कोरट हइ भेज देते अन्दर।

हिहिहिहिही। मुरुख समझल हे , चुपे से देखबे केकरो पता थोड़ेही चलत। ( कंचुकी नाही सुखत सुन सजनी उर बीच बहत पनाले)

मदन तिवारी
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