मूवी रिव्यू: कैसी है नवाजुद्दीन और सान्या की 'फोटोग्राफ'

Medhaj News 18 Mar 19,23:26:32 World
photograf.jpg

सेल्फी और इंस्टाग्राम के चट क्लिक, पट अपडेट के इस दौर में कभी दराज में पड़ी एक पुरानी फोटो हाथ लग जाए, तो आंखों में चमक और चेहरे पर मुस्कान आए बिना रह ही नहीं सकती। निर्देशक रितेश बत्रा ने अपनी ताजातरीन फिल्म फोटोग्राफ से दर्शकों की आंखों में वही चमक और चेहरे पर वही मुस्कान लाने की कोशिश की है। लेकिन कभी फिल्म लंच बॉक्स के जरिए प्यार की मीठी खुशबू दुनिया भर में पहुंचाने वाले रितेश इस फोटोग्राफ में इतने रंग नहीं भर पाए हैं कि दर्शक मंत्रमुग्ध हो जाएं। फिल्म में कई नोस्टैलजिक मोमेंट्स हैं, जो भागती-दौड़ती जिंदगी में ठहराव के पलों जैसा सुकून देते हैं, लेकिन जैसे लंबे समय का ठहराव उबाऊ हो जाता है, वैसे ही सुस्त गति से एक ढर्रे पर चलती यह फिल्म भी दर्शकों के धैर्य की परीक्षा लेती है। फिल्म में फरीक (नवाजुद्दीन सिद्दीकी) गेटवे ऑफ इंडिया पर फटाग्रफर है, जो छोटे से कमरे में चार-पांच लोगों के साथ जैसे-तैसे गुजर-बसर करता है। जबकि मिलोनी (सान्या मल्होत्रा) सीए फाउंडेशन कोर्स की टॉपर, जिसकी तस्वीरें कोचिंग सेंटर की होर्डिंग पर शहर भर में लगी हैं। फरीक एक दिन मिलोनी की तस्वीर खींचता है, लेकिन वह उसे पैसे दिए बिना ही गायब हो जाती है। इधर, रफीक की दादी (फर्रुख जफर) उसकी शादी के पीछे पड़ी है, तो रफीक मिलोनी की तस्वीर के साथ उन्हें चिट्ठी भेज देता है कि उसने यह नूरी नाम की लड़की पसंद कर ली है। मुसीबत तब होती है, जब दादी नूरी यानी मिलोनी से मिलने आ पहुंचती हैं। रफीक मिलोनी से नूरी बनकर दादी से मिलने के लिए कहता है। हैरानी की बात यह है कि मिलोनी बिना किसी सवाल-जवाब के रफीक की बात मान लेती है। शायद इसलिए, क्योंकि उसे रफीक की खींची फोटो वह ज्यादा खुश और सुंदर नजर आती है। खैर, दादी के बहाने रफीक और मिलोनी की मुलाकातें बढ़ती हैं और प्यार का अहसास भी, जिसकी परिणति आपको फिल्म देखकर पता चलेगी। रितेश की यह फिल्म कई मायनों में लंच बॉक्स की याद दिलाती है। लंच बॉक्स की तरह, इसमें भी बिना कुछ बोले बहुत कुछ कह जाने की कोशिश है।





वहीं, मुंबई शहर इस फिल्म में भी एक प्रमुख किरदार के रूप में मौजूद है। गेटवे ऑफ इंडिया और आसपास के इलाकों को सिनमेटोग्राफर टिम गिलिस और बेन कचिंस ने अपने कैमरे से बखूबी दर्शाया है। मिलोनी के बचपन पसंदीदा कोला ब्रैंड कैंपा कोला (जो बंद हो चुका है), रफीक का महीने के आखिर में कुल्फी खाना, कहानी के साथ बुने गए नूरी..., हमने तुम्हें देखा... जैसे पुराने गाने नोस्टैल्जिया क्रिएट करते हैं। लेकिन रितेश इस बार अपने किरदारों को ढंग से डेवलप नहीं कर पाए हैं। नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने हमेशा की तरह बढ़िया ऐक्टिंग की है लेकिन वह कुछ अलग नहीं लगे हैं। मिलोनी के रूप में सान्या मल्होत्रा की मेहनत दिखती है। वहीं, फर्रुख जफर अपनी पिछली फिल्मों की तरह ही, नॉनस्टॉप बोलने वाली घर की बुर्जुग के रूप में कभी प्यारी लगती हैं, तो कभी लाउड। विजय राज अपने कैमियो में याद रह जाते हैं। जबकि, बाकी कलाकारों के लिए करने के लिए कुछ खास नहीं है। फिल्म की आईएमडीबी रेटिंग तीन है, तो लीक से हटकर फिल्म देखने के शौकीन एक बार इस फोटोग्राफ की दर्शक लिस्ट में शामिल हो सकते हैं।


    Comments

    Leave a comment


    Similar Post You May Like