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पाकिस्तान इस मामले में भी भारत से है पीछे

Medhaj News 6 Nov 19,23:04:13 World
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भारत सबसे बड़ा लोकतंत्र है और यहां हर किसी को अपनी बात रखने की पूरी आजादी है। इधर आम आदमी भी सोशल मीडिया के जरिए सिर्फ इसलिए अपनी हर बात को प्रधानमंत्री तक पहुंचा पाता है, क्योंकि यहां आपको इंटरनेट की आजादी (Internet Freedom) है। भारत का कोई भी व्यक्ति पूरी दुनिया पर अपनी नजर रख सकता है, क्योंकि यहां आप पर कोई बैन नहीं है। आपको इंटरनेट यूज करने की आजादी है। हालांकि, ऐसा पड़ोसी देश पाकिस्तान में नहीं है। यह हम नहीं कह रहे बल्कि एक रिपोर्ट जारी हुई, जिसमें कई तरह से बड़े खुलासे पाकिस्तान को लेकर हुए। ज्ञात हो कि अभी जब भारत द्वारा जम्मू-कश्मीर से Article 370 हटाया गया तो इससे पाकिस्तान को सबसे बड़ा झटका लगा। पाकिस्तान ने कहा कि भारत ने कश्मीर में कई तरह के बैन लगा दिए हैं, जिनमें एक सूचना के अधिकार को खत्म करना भी था। हालांकि, अब जो रिपोर्ट सामने आई है, उसमें पाकिस्तीन की सारी पोल खुल गई है।





एक अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट ने पाकिस्तान को लगातार नौवें साल इंटरनेट के इस्तेमाल के मामले में स्वतंत्र नहीं घोषित किया है, देश ने 2019 में पिछले साल से भी बदतर नंबर हासिल किए। पाकिस्तान 100 सबसे खराब देशों की श्रेणी (वो देश जहां खुलकर इंटरनेट के इस्तेमाल की आजादी नहीं है) में पहले 27वें नंबर पर था, लेकिन अब 100 में से वो 26 पर आ गया है। अंतर्राष्ट्रीय वॉचडॉग, द फ्रीडम हाउस ने मंगलवार को 2019 के लिए अपनी फ़्रीडम ऑन द नेट (FoTN) की रिपोर्ट जारी की, जिसको शीर्षक 'द क्राइसिस ऑफ़ सोशल मीडिया' दिया गया। इसमें रिपोर्ट किया गया कि जून 2018 से लेकर मई 2019 के बीच वैश्विक इंटरनेट स्वतंत्रता में भारी गिरावट दर्ज की गई, यानी इंटरनेट की आजादी कम हुई। इस रिपोर्ट में पाकिस्तान को सबसे खराब देशों की श्रेणी, जिनमें इंटरनेट की आजादी नहीं है, उनमें 26 नंबर पर रखा गया है।





विश्व स्तर पर देखा जाए तो पाकिस्तान इंटरनेट और डिजिटल मीडिया की स्वतंत्रता के मामले में सबसे खराब 10 देशों में से एक है। क्षेत्रीय रैंकिंग के मामले में, वियतनाम और चीन के बाद पाकिस्तान तीसरा सबसे खराब देश बन गया है। इंटरनेट की स्वतंत्रता में गिरावट के अलावा, रिपोर्ट में पाकिस्तान में सूचनात्मक रणनीति के माध्यम से चुनाव में हेरफेर पाया गया, जैसे कि अति-पक्षपातपूर्ण टिप्पणीकारों या समाचार साइटों के समन्वित उपयोग, झूठी या भ्रामक सामग्री फैंलाना। इसके साथ ही कनेक्टिविटी पर जानबूझकर प्रतिबंध लगाने और वेबसाइटों को अवरुद्ध करने जैसी बातें सामने आईं।


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