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एक गुरु, मार्गदर्शक एवं संरक्षक को समर्पित

Medhaj News 5 Sep 19,22:42:22 World
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गुरू ब्रम्हा, गुरू विष्णु, गुरू देवो महेश्वरा, गुरू साक्षात परम्ब्रम्ह तस्मय श्री गुरूवनमः



चलते-चलते पग जब थक कर रूकने लगे,

न-उम्मीदों के बादल जब घिरने लगे;

न रास्ता दिखे, न ही मन्जिल मिले,

तब पीछे से ध्वनि एक कानों में बजे



न रूक तू, कदम बस तू आगे बढ़ा,

उम्मीदों के तरकश से तीरों को चला;

मेहनत की ईंटों से तू सीढ़ी बना,

चिन्तन तू कर और चिन्ता को भगा।



ज्ञान को सबसे मजबूत हथियार तू बना,

देख कैसे दुखों का तेरे होगा खात्मा।

तू डरता है क्यों, जब मैं हूँ पीछे खड़ा,

थाम लूंगा तुझे, अगर तू नीचे गिरा।



बस कोशिश तेरी सच्ची होनी चाहिये,

और नीयत तेरी अच्छी होनी चाहिये।

तेरे संग हूँ मैं मौजूद यू हीं हर जगह,

अब तू पत्थर समझ या अपने दिल में बसा।



सफलता का सूत्र, ये मान ले तू सदा;

कर प्रतियोगिता खुद से, ना औरों को गिरा।

ये जीवन है अनमोल, न खुद को अपना दुश्मन बना,

इस बहुमुल्य जीवन को ना यूंहीं व्यर्थ तू गवा।



खुश रहना सीख ले और सबको तू हँसा,

सुखी जीवन का है बस यही है छोटा सा फलसफा,

ईश्वर भी तेरे संग आ जायेगा वहाँ,

तेरी वजह से एक भी चेहरे पर मुस्कान आयी हो जहाँ।



चल अब आगे बढ़, थोड़ी हिम्मत तू जुटा,

आत्मविश्वास की पूंजी को थोड़ा सा बढ़ा।

रास्तें भी हैं और आगे मन्जिलें भी हैं;

अपने भी हैं और तेरे सारे सपनें भी हैं।



इसलिये धीरे ही सही, पर कदम तू बढ़ा;

सच्चे प्रयासों से, अपने सपनों को मंजिल से मिला,

न डर तू किसी से, मैं हूँ  पीछे खड़ा;

थाम लूंगा तुझे, अगर तू गिरा।

...........थाम लूंगा तुझे, अगर तू गिरा।



गुरु केवल वह नहीं जो हमें कक्षा में पढ़ाते हैं बल्कि हर वो व्यक्ति जिससे हम सीखते हैं वह हमारा गुरु है।

शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं!



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(भावना मौर्य)

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