क्रिसमस ट्री से झुडी ये मान्यताएं,भूत प्रेत से लेकर जन्म मरण तक फैली!
क्रिसमस का त्यौहार आजकल केवल ईसाइ धर्म के लोग ही नहीं बल्कि बाकि धर्मों के लोग बड़े ही उत्साह के साथ मनाते हैं। यह त्यौहार हर जगह अब काफी प्रचलित हो चुका है।
यूरोपीय देशों में तो क्रिसमस पर क्रिसमस ट्री लगाना अनिवार्य परम्परा सी बन गई है। यदि प्राकृतिक वृक्ष न हो तो फिर नकली बनाए पेड़ खरीद कर घरों में लगाकर सजाए जाते हैं। आज बाजार में क्रिसमस ट्री के अनेक नकली वृक्ष मिलने लगे हैं। सम्पन्न वर्ग के लोग तो क्रिसमस ट्री को सोने चाँदी से भी सजाने लगे हैं। एक मन्यता के अनुसार क्रिसमस ट्री को क्रिसमस पर सजाने की परम्परा जर्मनी से प्रारम्भ हुई।
आइए आज आपको क्रिसमस ट्री से जुड़े कई अनजाने तथ्यों के बारे में बताते हैं...
यूरोपीय देशों जैसे बेल्जियम, नार्वे, स्वीडन तथा हालैण्ड में भूत प्रेतों को भगाने के लिए क्रिसमस ट्री की टहनियों का प्रयोग किया जाता है।
क्रिसमस ट्री को इंग्लैण्ड में लोग किसी के जन्मदिन, विवाह या किसी परिजन की मृत्यु हो जाने पर भी उसकी याद में लगाते हैं। यहां से 19वीं सदी में यह परम्परा इंग्लैण्ड में भी पहुंच गई। जहां से सारे विश्व में यह परम्परा प्रचलन में आ गई। अमेरिका में इसे जर्मनी के अप्रवासियों ने प्रारम्भ किया था।
वैसे क्रिसमस ट्री की कहानी प्रभु यीशु मसीह के जन्म से है। जब उनका जन्म हुआ था, तब उनके माता-पिता मरियम व जोसफ को बधाई देने वालों ने जिनमें स्वर्गदूत भी थे, उन्होंने एक सदाबहार फर को सितारों से रोशन किया था। तब से ही सदाबहार फर के पेड़ को क्रिसमस ट्री के रूप में मान्यता मिली।
क्रिसमस ट्री को लेकर कई और मन्यताएं भी हैं। प्राचीन रोम में एक मन्यता के अनुसार इस वृक्ष की एक छोटी शाखा को एक शिशु ने भोजन और आवास के बदले कुछ आदिवासियों को दी थी। ऐसा माना जाता है कि वह शिशु और कोई नहीं स्वंय प्रभु यीशु मसीह थे। घरों में क्रिसमस ट्री लगाकर लोग क्रिसमस पर अच्छे फलों की प्राप्ति की कामना करते हैं।
यही है कुछ मान्यताएं जो क्रिसमस ट्री से जुडी है।
