ज़िन्दगी और एक सवाल?

Medhaj News 12 Jan 19 , 06:01:39 Sports
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मकड़ी के जालों सी हो गयी है ज़िन्दगी ,

असुलझे सवालों सी हो गयी है ज़िन्दगी।

संतुष्टि के सिवा सब कुछ मिल रहा है यहाँ,

फिर भी उलझनों के जंजालों सी हो गयी है ज़िन्दगी।

 

क्या करें क्या न करें, इसी में उलझ के रह गये;

ये खुश रहे, वो बुरा ना माने, इसी में फंस के रह गये।

समाज के नियमों ने इस कदर जकड़ा है हमें,

कि आधार बिना ईमारत सी हो गयी है ज़िन्दगी।

 

हर एक को खुश रखना मुमकिन नहीं यहाँ,

पर अब अंतर्मन की ध्वनि इंसान सुनता है कहाँ।

इसी उम्मीद में वर्तमान को जलाकर कर रहे हैं रोशनी,

कि आज थोड़ा सह ले कल जी लेंगे ज़िन्दगी।।

 

पर क्या वो कल आएगा???

कल भी तो फिर वर्तमान बन जायेगा???

इस कविता के माध्यम से मेरा उद्देश्य जीवन के प्रति कोई नाकारात्मकता फैलना नहीं है वरन् इस पर प्रकाश डालना है कि हमारा वर्तमान सबसे कीमती है जो कभी लौट कर नहीं आता। अच्छे भविष्य के लिये प्रयत्नशील रहना निश्चय ही अच्छा होता है परन्तु ध्यान देने योग्य बात यह है कि कहीं हमारा वर्तमान हमारी कोशिशों की भेंट तो नहीं चढ़ रहा।

"अत:,अपने आज को खुलकर जिए और उसका सदुपयोग करें"

---------- भावना मौर्य

    Comments

    • Medhaj News
      Updated - 2019-01-16 16:39:15
      Commented by :Bhavna Tiwari

      Wonderful lines !!


    • Medhaj News
      Updated - 2019-01-13 22:57:40
      Commented by :Prashant

      Very true lines Mam


    • Medhaj News
      Updated - 2019-01-13 23:02:44
      Commented by :Prashant

      Very true lines Mam


    • Medhaj News
      Updated - 2019-01-13 14:44:31
      Commented by :Kunal Chandra

      Yes really I feel connected with these lines its awesome


    • Medhaj News
      Updated - 2019-01-13 14:43:47
      Commented by :Ishan Joshi

      Very beautifully written and very true as well Bhawna ji


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