मैं ऐसी ही हूँ!
Medhaj News 27 Apr 19 , 06:01:39 Sports
लोग कहते हैं कि,
वो नहीं समझते मुझे;
क्योंकि मैं चाहती नहीं कि,
कोई भी समझे मुझे।
मैंने अपनी ही है,
इक दुनिया बनायी हुई;
क्योंकि बाहर की दुनिया,
नहीं जँचती मुझे।
न उम्मीद है किसी से,
न गिला है कोई;
यहाँ बस वर्तमान है,
भूत न भविष्य का-
सिलसिला है कोई।
क्यों सोचूँ कि-
मैं हूँ गलत या सही?
जब दुनियदारी से मुझे,
कोई मतलब ही नहीं।
मैं खुश हूँ अपने,
बनाये दायरों में सदा;
किसी को लगे अच्छी तो,
किसी को लगे बुरी, मेरी ये अदा।
इन दायरों के भीतर,
बस आ सकता है वो,
मुझे मेरी कमियों के साथ भी,
अपना सकता है जो।
न चाहत बड़ी है मेरी,
न ज्यादा महत्वकांक्षी हैं हम;
जो दे दिया है ईश्वर ने,
बस खुश हैं हम उसी में और,
अपनों के दिल में छोटी सी जगह पाने के आकांक्षी हैं हम।
(---भावना मौर्या----)


