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हिमाचल प्रदेश में 70 साल की सबसे भीषण बाढ़, उत्तरकाशी में तबाही अब दिल्ली पर है खतरा

Medhaj News 19 Aug 19 , 06:01:39 Sports
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पंजाब, हरियाणा, हिमाचल और उत्तराखंड समेत उत्तर भारत के कई राज्यों में हो रही भारी बारिश का असर अब दिल्ली पर भी पड़ने वाला है। शिमला मौसम विभाग के अनुसार, सोमवार को बारिश से राहत मिलने की उम्मीद है। इस बीच, शिमाल, सोलन, बिलासपुर और कुल्लू जिले में आज शिक्षण संस्थान बंद रहेंगे। हरियाणा के हथिनीकुंड बैराज से रविवार शाम 6 बजे तक 8.72 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया था। इसके चलते सोमवार को अभी यमुना का जलस्तर 204.70 पहुंच गया है। दोनों राज्यों में बारिश और बाढ़ में कम से कम 31 जिंदगियां बह चुकी हैं, जबकि कई लोग लापता हैं। इन राज्यों की बारिश का असर अब राजधानी दिल्ली पर भी पड़ने की आशंका है। यमुना में जलस्तर बढ़ने के बाद हरियाणा के हथिनीकुंड बैराज से रविवार को 8.72 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया था, जो सोमवार शाम तक दिल्ली पहुंच जाएगा। यमुना में इतना पानी अबतक नहीं छोड़ा गया था। 1978 में यमुना में सबसे बड़ी बाढ़ आई थी और तब हरियाणा से 7 लाख क्यूसेक ही पानी छोड़ा गया था।





खतरे को देखते हुए दिल्ली सरकार ने आपात बैठक बुलाई है। इस बीच, निचले इलाकों से लोगों को हटाया जा रहा है। दिल्ली प्रशासन ने एहतियात बरतते हुए रविवार की सुबह से ही यमुना किनारे के प्रभावित इलाकों में लोगों को जल्द से जल्द खाली करने का आदेश दिया है। इनमें सोनिया विहार, गीता कॉलोनी, मयूर विहार, डीएनडी, यमुना बाजार, कश्मीरी गेट, वजीराबाद, लोहे का पुल, आईटीओ, ओखला, जामिया और जैतपुर के आसपास के इलाके शामिल हैं। सोमवार को लोगों को टेंटों में शिफ्ट कर दिया जाएगा। इसके लिए यमुना किनारे ही सुरक्षित स्थानों पर टेंट लगाए गए हैं। अभी करीब 1100 टेंट लगाए गए हैं और करीब 5 हजार लोगों की शिफ्टिंग और खाने-पीने का इंतजाम प्रशासन की तरफ से किया गया है। जरूरत पड़ने पर इसे और बढ़ाया जा सकता है। इन जगहों पर पीने के पानी के लिए टैंकर और मोबाइल टॉइलट्स का भी इंतजाम किया जा रहा है। साथ ही डॉक्टरों की टीमें भी सभी जगह तैनात की जा रही है।हालांकि कुछ समय पहले ही दिल्ली में यमुना के जलस्तर का खतरे का लेवल बदला गया है, अब यह 206 मीटर से ज्यादा हो गया है, लेकिन रविवार की शाम को जो पानी छोड़ा गया है, उसकी वजह से सोमवार दोपहर तक ही जलस्तर 207.32 मीटर के पार पहुंचने की संभावना है।





रविवार को हिमाचल में एक दिन में सबसे ज्यादा बारिश दर्ज की गई। रविवार को राज्य में 102.5mm बारिश हुई, जो सामान्य से 1,065% ज्यादा थी। इसे 70 सालों की सबसे बड़ी बाढ़ बताया जा रहा है। बाढ़ के कारण राज्य में 13 नैशनल हाइवे समेत करीब 670 सड़कें भूस्खलन के कारण जाम हो गईं या फिर बह गईं हैं। हिमाचल में छुट्टियां मनाने आए पर्यटक लाहौल-स्पीति और मनाली-मंडी हाइवे पर फंसे हुए हैं। उधर, उत्तराखंड में पिछले 24 घंटों के दौरान 34.2mm बारिश दर्ज की गई है जो 159% ज्यादा है। बता दें कि इस दौरान वहां 13.2mm बारिश होती रही है। उत्तराखंड में बारिश से सबसे ज्यादा प्रभावित उत्तराकाशी की मोरी तहसील का आराकोट क्षेत्र हुआ है। बादल फटने के बाद उफान पर आए बरसाती नालों ने भयानक तबाही मचाई है। राज्य में 10 लोगों की जान गई है, जबकि 17 लोग लापता हैं। अधिकारियों ने बताया कि अचानक आई बाढ़ से मोरी ब्लॉक में बड़ी तबाही हुई है। सैकड़ों एकड़ फसल बर्बाद हो गई है जबकि कई मवेशियों के मारे जाने की आशंका है। बाढ़-बारिश के कारण पानी, बिजली और संचार सेवाओं पर बुरा असर पड़ा है।



 


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