क्या आपको पता है क्रिकेट में ड्रॉप-इन पिच क्या होती है ?
पर्थ की पिच ड्राप इन पिच है- ऐसी पिच जो दूसरी जगह बनाई जाती है और जहां मैच है वहाँ लगा दी जाती है, उसे ड्राप इन पिच कहते है ये वही पिच है जहाँ आजकल भारत और ऑस्ट्रेलियाई खेल रहे है, इस पिच की खास बात ये है ये रोज उठाके रक्खी जा सकती है इसे स्टील के फ्रेम बंद रखा जाता , सिंगल स्लैब की तरह ट्रांसपोर्ट किया जाता है, इसकी लंबाई 24 मीटर होती है, चोडाई 3 मीटर और गहराई 20 सेंटीमीटर होती है, अभी खेले जा रहे मैच में गेंद 2 दिन तेज रहेंगी, असमान उछाल रहेगा दो दिन बाद बल्लेबाजो को भी पर्याप्त मौक़ा मिलता है | , इस पिच का आईडिया न्यूजीलैंड में आया जहां रग्बी बहुत खेला जाता है |
सबसे पहले पर्थ WACA के क्यूरेटर जॉन मैले ने वर्ल्ड सिरीज़ क्रिकेट के मैचों के लिए ड्रॉप-इन पिचें बनाई थीं, जो साल 1970 के दशक में ऑस्ट्रेलियाई कारोबारी केरी पैकर ने आयोजित कराई थी | इसी उद्देश्य के लिए बनाई गई कम फ़्लोटेशन वाली StrathAyr TransportAyr आउटफ़ील्ड को नुक़सान नहीं पहुंचाती | और जहां ये उपलब्ध नहीं होती, वहां क्रेन और लिफ़्टिंग फ़्रैम इस्तेमाल की जाती है |

