हनुमान जयंती 2018:जानें शिव के 11वें रुद्रावतार हनुमान जी की शुभ पूजा मुहूर्त
अष्टसिद्धि और नौ निधियों के प्रदाता हनुमान जी का जन्मोत्सव शनिवार को है। नौ साल बाद शनिवार के दिन हनुमान जयंती पड़ रही है। इसके साथ ही ज्योतिषी हिसाब से कई मंगलकारी योग बन रहे हैं। शनिवार को ही मंगल और शनि धनु राशि में हैं। शनि और मंगल का विशेष द्विग्रही योग बन रहा है। हस्त नक्षत्र भी है। काफी समय बाद मार्च के माह में ही हनुमान जयंती पड़ रही है। चूंकि इस नवसंवत्सर के राजा सूर्य और मंत्री शनि हैं, इसलिए भी हनुमान जयंती खास है। ग्रहों की पीड़ा शांत करने का विशेष अवसर है।
हनुमान जयंती- चैत्र मास की पूर्णिमा के दिन ब्रह्म मुहूर्त यानी प्रात: 4 बजे अंजनी के गर्भ से हनुमान जी का जन्म हुआ था। इनके पिता हैं वानरराज केसरी। इसलिए, इनको केसरीनंदन भी कहते हैं। रामभक्त के रूप में हनुमानजी को तो सभी जानते हैं। लेकिन उनकी अन्य भी विशेषताएं हैं। वह समस्त वेदों के ज्ञाता, नाना पुराण आख्याता, ज्योतिषी, संगीतज्ञ, वानरराज, यंत्र-मंत्र और तँत्र के सिद्धहस्त होने के साथ-साथ संकटमोचन भी हैं। अकेले उनको ही यह वरदान प्राप्त है कि वह समस्त संकट हर सकते हैं। सर्व कार्य सिद्ध कर सकते हैं। वह सूर्य के शिष्य हैं। सूर्य भगवान का जप-तप-ध्यान करने से ही उनको असाधारण सिद्धियां और निधियां प्राप्त हुईं। अणिमा,( आकार बढ़ा सकते हैं) लघिमा ( आकार छोटा कर सकते हैं) गरिमा ( भारी कर सकते हैं), प्राप्ति ( कुछ भी प्राप्त कर सकते हैं), प्राकाम्य ( सर्व प्रदाता), महिमा( यश-कीर्ति), ईशित्व (ईशरत्व) और वशित्व( वशीकरण) का अधिकार केवल हनुमानजी को ही प्राप्त है। तभी उनको कहा गया-अष्ट सिद्धि-नौ निधियों के दाता।
हनुमान जी की पूजा से सर्वग्रहों की पीड़ा शांत होती है। यह वरदान उनको भगवान शंकर से प्राप्त हुआ है। वह भगवान शंकर के 11 वें रुद्रावतार हैं। वह रुद्र भी हैं और भोले भी। जिस भाव से उनको भजा जाता है, वह उसी शक्ति में आते हैं। उनकी पूजा अग्नितत्व है। वायु तत्व है। सूर्य को सेब समझकर मुंह में रख लिया। इंद्र ने वार किया तो ठोड़ी पर लगा। संस्कृत में ठोड़ी को हनु कहते हैं। बस, नाम पड़ गया हनुमान।
पूर्णिमा तिथि शुरू: 30 मार्च 2018 शाम 7 बजकर 35 मिनट 30 सेकेंड से 31 मार्च 2018 शाम 6 बजकर 6 मिनट 40 सेकेंड तक रहेगी। शुभ मुहूर्त प्रातः 9:20 से 1:30 तक तथा सांय 3:00 से 6 बजे तक रहेगा। ग्रहों की शांति के लिए सायंकाल का पूजन श्रेष्ठ रहेगा। हनुमान जी की गुरु के रूप में पूजा का समय 9.20 से है।


