Headline



विक्रम लैंडर चांद की विपरीत कक्षा में शिफ्ट हुआ, अब चांद बस मुट्ठी में है

Medhaj News 3 Sep 19,19:15:47 Science & Technology
chandra.png

इसरो (ISRO) के वैज्ञानिकों ने आज (मंगलवार) सुबह विक्रम लैंडर को चांद की विपरीत कक्षा में शिफ्ट कराया है | ये शिफ्टिंग सुबह 8.50 बजे कराई गई |  विक्रम लैंडर चंद्रयान-2 (Chandrayaan-2) से अलग होने के बाद लगभग 20 घंटे तक ऑर्बिटर की कक्षा में ही चक्कर लगाया | अब ये ऑर्बिटर से विपरीत कक्षा में चक्कर लगा रहा है | इस घटना को वैज्ञानिक डिऑर्बिट कहते हैं | विक्रम लैंडर 7 सितंबर को चांद की सतह पर उतरेगा | इसे चांद के दक्षिणी ध्रुव पर उतारा जाएगा | सतह पर उतरने से पहले विक्रम लैंडर लगभग 2 किमी प्रति सेकंड की गति से चांद के चारों तरफ चक्कर लगाता रहेगा | दो सितंबर को लैंडर ‘विक्रम’ ऑर्बिटर से अलग होने के बाद यह सात सितंबर को चांद के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ करेगा | ऐसा करके भारत चांद के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में पहुंचने वाला दुनिया का पहला देश बन जाएगा |





भारत से पहले रूस, अमेरिका और चीन चांद पर पहुंच चुके हैं लेकिन वे चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में नहीं पहुंच पाए थे | लैंडर के चंद्रमा की सतह पर उतरने के बाद इसके भीतर से ‘प्रज्ञान’ नाम का रोवर (Pragyan Rover) बाहर निकलेगा और अपने 6 पहियों पर चलकर चांद की सतह पर वैज्ञानिक प्रयोग करेगा | चंद्रयान-2' मिशन की सफलता भारत के लिए गौरवशाली क्षण होगा क्योंकि चांद के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में अभी तक कोई देश नहीं पहुंचा है | इससे चांद के अनसुलझे रहस्य जानने में मदद मिलेगी | यह ऐसी नई खोज होगी, जिसका भारत और पूरी मानवता को लाभ मिलेगा | 15 जुलाई को रॉकेट में तकनीकी खामी का पता चलने के बाद ‘चंद्रयान-2' का प्रक्षेपण टाल दिया गया था | समय रहते खामी का पता लगाने के लिए वैज्ञानिक समुदाय ने इसरो की सराहना की थी |


    Comments

    Leave a comment



    Similar Post You May Like

    Trends