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भारत का GSAT-7A पहुँच गया अंतरिक्ष मे

medhaj news 19 Dec 18,23:57:28 Science & Technology
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भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) का 39 वां संचार उपग्रह जीसैट-7ए श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर से बुधवार को लांच हो गया। शाम 4 बजकर 10 मिनट पर जीएसएलवी-एफ11 रॉकेट को लांच किया गया। इसरो द्वारा निर्मित जीसैट-7ए का वजन 2,250 किलोग्राम है और यह मिशन आठ साल का होगा।





इससे वायुसेना के एयरबेस को इंटरलिंक करना सुगम हो जाएगा वहीं वायुसेना की संचार शक्ति भी बढ़ जाएगी। साथ ही यह उपग्रह ड्रोन ऑपरेशंस में भी मदद करेगा। इसरो ने मिशन रेडिनेस रिव्यू कमेटी और लांच ऑथराइजेशन बोर्ड ने इसका काउंटडाउन मंगलवार को ही शुरू कर दिया था। जीएसएलवी-एफ11 की यह 13वीं उड़ान है और सातवीं बार यह स्वदेशी क्रायोनिक इंजन के साथ लांच हो रहा है। यह कू-बैंड में संचार की सुविधा उपलब्ध करवाएगा। इसरो का यह 39वां संचार उपग्रह होगा और इसे खासकर भारतीय वायुसेना को बेहतर संचार सेवा देने के उद्देश्य से लांच किया गया है।



जीसैट-7ए वायुसेना के एयरबेस को इंटरलिंक करने के अलावा ड्रोन ऑपरेशंस में भी मदद करेगा। फिलहाल भारत अभी अमेरिका में बने हुए प्रीडेटर-बी या सी गार्डियन ड्रोन को हासिल करने की कोशिश कर रहा है। सैटेलाइट कंट्रोल के जरिए ये ड्रोन अधिक ऊंचाई पर दुश्मन पर हमला करने की क्षमता रखता है।





इस वक्त धरती के चारों ओर दुनियाभर की लगभग 320 मिलिटरी सैटेलाइट चक्कर काट रही हैं। जिनमें से अधिकतर अमेरिका की हैं। इसके बाद इस मामले में रूस और चीन का नंबर आता है। इनमें से अधिकतर रिमोट-सेंसिंग हैं। ये धरती की निचली कक्षा में मौजूद रहकर धरती के चित्र लेने में मददगार होते हैं। वहीं निगरानी, संचार आदि के लिए कुछ सैटेलाइट को धरती की भू-स्थैतिक कक्षा में ही रखा जाता है। ये सैटेलाइट पाकिस्तान के खिलाफ भारत द्वारा की गई सर्जिकल स्ट्राइक में भी मददगार साबित हुई थीं। चीन इस मामले में लगातार प्रगति करता जा रहा है, जिसके बाद भारत भी अब तैयार हो रहा है।


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