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Gsat 7a वायुसेना को देगा ताकत

medhaj news 19 Dec 18,15:17:18 Science & Technology
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इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन यानी इसरो अपने अगले कम्यूनिकेशन सैटलाइट Gsat-7A को बुधवार को लॉन्च करने की तैयारी कर रहा है। बताया जा रहा है कि यह सैटलाइट भारतीय वायुसेना के लिए बहुत खास है। आइए, जानते हैं कि सेना के लिए इस सैटलाइट का क्या महत्व है। Gsat-7A का लॉन्च जीएसएलवी-एफ11 रॉकेट से बुधवार शाम 4:10 बजे श्रीहरिकोटा के लॉन्च पैड से किया जाएगा। जैसे ही यह सैटलाइट जियो ऑरबिट में पहुंचेगा इस कम्यूनिकेशन सैटलाइट के जरिए भारतीय वायुसेना के सभी अलग-अलग ग्राउंड रेडार स्टेशन, एयरबेस और AWACS आपस में इंटरलिंक हो जाएंगे। इससे नेटवर्क आधारित वायुसेना की लड़ने की क्षमता में कई गुणा ज्यादा बढ़ोतरी होगी। 



इस सैटलाइट की लागत 500-800 करोड़ रुपये बताई जा रही है। इसमें 4 सोलर पैनल लगाए गए हैं जिनके जरिए करीब 3.3 किलोवाट बिजली पैदा की जा सकती है। इसके साथ ही इसमें कक्षा में आगे-पीछे जाने या ऊपर जाने के लिए बाई-प्रोपेलैंट का केमिकल प्रोपल्शन सिस्टम भी दिया गया है। Gsat-7A से पहले इसरो Gsat-7 सैटलाइट जिसे 'रुक्मिणि' के नाम से जाना जाता है, का लॉन्च कर चुका है। इसका लॉन्च 29 सितंबर 2013 में किया गया था और यह भारतीय नौसेना के लिए तैयार किया गया था। यह सैटलाइट नेवी के युद्धक जहाजों, पनडुब्बियों और वायुयानों को संचार की सुविधाएं प्रदान करता है। माना जा रहा है कि आने वाले कुछ सालों में भारतीय वायुसेना को एक और सैटलाइट Gsat-7C मिल सकता है जिससे इसके ऑपरेशनल आधारित नेटवर्क में और ज्याद बढ़ोतरी होगी। 


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