Headline



प्याज के बाद अब देश में खाने के तेल के दाम बढ़ने लगे

Medhaj News 10 Dec 19,18:32:21 Science & Technology
Karobar_Onion.png

प्याज के बाद अब देश में खाने के तेल (Edible oil expensive) के दाम बढ़ने लगे हैं | सोयाबीन उत्पादक राज्यों में बेमौसम बारिश और बाढ़ से फसल को भारी नुकसान हुआ है | इसीलिए देश में सोयाबीन और सरसों समेत तमाम तेल और तिलहनों के दामों में तेजी का रुख बना हुआ है | अंग्रेजी के बिजनेस अखबार फाइनेंशियल एक्सप्रेस के मुताबिक, सोयाबीन तेल (Soybean Oil) की कीमतें बढ़ने से भारत में कई खाने-पीने वाली डिशेज भी महंगी हो सकती हैं | देश में बढ़ती डिमांड के चलते भारत ने सोयाबीन तेल का इंपोर्ट 100 गुना तक बढ़ा दिया है | वित्त वर्ष 2014-15 से वित्त वर्ष 2016-17 तक देश में कुल 10-70 लाख रुपये का सोयाबीन तेल भारत में इंपोर्ट किया गया था | वहीं, वित्त वर्ष 2017-18 में यह बढ़कर 1.67 करोड़ रुपये हो गया था | साथ ही, मौजूदा वित्त वर्ष में अभी तक 167 करोड़ रुपये का सोयाबीन तेल इंपोर्ट किया जा चुका है | आपको बता दें कि भारत खाद्य तेल (Edible oil) का दुनिया में प्रमुख आयातक है | 





पिछले सीजन 2018-19 (नवंबर-अक्टूबर) में भारत ने 155 लाख टन से ज्यादा वनस्पति तेल का आयात किया, जिसमें खाद्य तेल का कुल आयात 2018-19 में 149.13 लाख टन था | देश में सबसे ज्यादा आयात पाम तेल का होता है, ऐसे में आने वाले दिनों में पाम तेल के दाम बढ़ने से देश मे उपभोक्ताओं को और महंगा खाद्य तेल मिलेगा | बीते दो महीने में क्रूड पाम ऑयल के दाम में 26 फीसदी से ज्यादा का उछाल आया है | वहीं, सरसों की कीमतों में 300 रुपये कुंटल की वृद्धि दर्ज की गई है | जबकि सोयाबीन का दाम करीब 400 रुपये प्रति कुंटल बढ़ा है | कारोबारियों का कहना है कि देश में मानसून सीजन के दौरान भारी बारिश के कारण खरीफ तिलहन फसल, खासतौर पर सोयाबीन के खराब होने और चालू रबी सीजन में तिलहनों की बुवाई सुस्त होने की वजह से घरेलू बाजार में तेल और तिलहनों के दाम बढ़ गए है | उपभोक्ता मामलों के मंत्री राम विलास पासवान (Consumer Affairs Minister Ram Vilas Paswan) ने राज्यसभा को बताया कि घरेलू उत्पादन इतना नहीं हो रहा है कि डिमांड को पूरा किया जा सके | इसीलिए सरकार खाद्य तेल का आयात कर रही है | सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सोपा) के अनुसार मौजूदा फसल सीजन 2019-20 में सोयाबीन का उत्पादन घटकर 89.84 लाख टन ही होने का अनुमान है जबकि पिछले साल 109.33 लाख टन का उत्पादन हुआ था | नई फसल की आवक के समय उत्पादक राज्यों में 1.70 लाख टन सोयाबीन का बकाया स्टॉक बचा हुआ था, अत: चालू सीजन में कुल उपलब्धता 91.54 लाख टन की बैठेगी |


    Comments

    Leave a comment



    Similar Post You May Like

    Trends