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मकर संक्रांति में सूर्य की आराधना, आइए जानते है क्या है इसका रहस्य

Medhaj News 15 Jan 20 , 06:01:40 India
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मकर संक्रांति में सूर्य की आराधना होती है वो सूर्य जिसके रथ में 7 घोड़े,12 पहिये और उन पहियों में 24 तीली जो चक्रवर्ती सम्राट अशोक की लाट में भी थी, अशोक ने सूर्य रथ से ही ली थी। 7 घोड़े का मतलब , रविवार से शनिवार है 24 तीली का मतलब 24,घण्टा, और 12 पहिये का मतलब 12 महीना है।पहले संक्रांति 14 जनवरी की पड़ती थी जो 2007 तक रही जोकि 1935 से है।वर्ष 2008 से 2080 तक मकर संक्राति 15 जनवरी को होगी। 2081 से आगे 72 वर्षों तक अर्थात 2153 तक यह 16 जनवरी को रहेगी।





सूर्य के धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश का दिन मकर संक्रांति के रूप में जाना जाता है। इस दिवस से, मिथुन राशि तक में सूर्य के बने रहने पर सूर्य उत्तरायण का तथा कर्क से धनु राशि तक में सूर्य के बने रहने पर इसे दक्षिणायन का माना जाता है। सूर्य का धनु से मकर राशि में प्रवेश प्रति वर्ष लगभग 20 मिनिट विलम्ब से होता है। स्थूल गणना के आधार पर तीन वर्षों में यह अंतर एक घंटे का तथा 72 वर्षो में पूरे 24 घंटे का हो जाता है। यही कारण है, कि अंग्रेजी तारीखों के मान से, मकर-संक्रांति का पर्व, 72 वषों के अंतराल के बाद एक तारीख आगे बढ़ता रहता है।---------आर्य


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