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भारत में मिली-जुली सरकारों की सार्थकता

Medhaj News 11 Apr 19 , 06:01:39 India
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इतिहास गबाह है मिली जुली सरकार कभी भी किसी भी देश मे , देश का विकास नही कर पाई 2019 में भारतीय जनता पार्टी को छोड़ कर कोई भी पार्टी पूर्ण बहुत के लिए लड़ ही नही रही। बहुमत के लिए 273 सीट चाहिए और कांग्रेस कुल 230 सीटो पर चुनाव लड़ रही है। बाकी लगभग सपा 37, माया 45,लालू 20,ममता 42 सीटो पर, मतलब सरकार बनाने के लिए कोई चुनाव नही लड़ रहा सिर्फ भाजपा को बहुमत न मिले इसलिए चुनाव लड़ रहे है। ऐसा क्यो ये सोचना का विषय है, कभी कांग्रेस के साथ ऐसा होता था, क्या अब सिर्फ भारतीय जनता पार्टी के राज होगा ये भी सोचने का विषय है।-------ArYa



मिली-जुली सरकार से तात्पर्य है कि कई दल स्पष्ट बहुमत प्राप्त न होने पर मिश्रित सरकार बनाते हैं । इन्हें  संविद सरकार संयुक्त मोर्चा मंत्रिमण्डल’ आदि भी कहा जाता है । भारत में समय-समय पर संयुक्त मोर्चे की सरकारें बनती रहती र्हे । परन्तु इनमें स्थिरता कायम नहीं हो पाई । भारत के अनेक राज्यों में ये सरकारें बनी और इनका पतन भी हुआ । इनकी असफलता का प्रमुख कारण इनमें व्याप्त अन्तर्विरोध थे । भारतीय राजनीतिक व्यवस्था को इन सरकारों ने बुरी तरह से प्रभावित किया । वर्तमान में तो इन सरकारों को बिशेष सफलता प्राप्त नहीं हो सकी किन्तु भविष्य के विषय में अभी भी प्रश्नचिन्ह लगे हुये हें ।





परिवर्तन तभी संभव है जब स्थिर और बहुमत वाली सरकार हो। सरकार में काम करने की मंशा हो। फैसले लेने की शक्ति हो। कुर्सी पर बने रहने की लालसा नहीं हो और बगैर किसी दबाव का निर्णय ले। विकास और जनता के प्रति जवाबदेही हो। व्यक्तिगत स्वार्थ से बाहर निकल कर राज्य हित में काम करने का जुनून हो।


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