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CAA: अब कोई भी बन सकता है भारतीय नागरिक, देने होगा अपने धर्म का सबूत

Medhaj News 28 Jan 20 , 06:01:40 Governance
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नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के तहत भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन करने वालों को अपने धर्म को साबित करना होगा। इससे जुड़े अधिकारियों ने ये जानकारी दी है। बता दें कि पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश के अल्पसंख्यक (हिंदू, सिख, जैन बुद्ध, ईसाई और पारसी) जो वहां धार्मिक भेदभाव झेल रहे हैं उन्हें संशोधित कानून (सीएए) के तहत भारत की नागरिकता दी जाएगी। इस कानून से मुस्लिम समुदाय को बाहर रखा गया है और ये उन लोगों पर लागू होगा जो साल 2014 के दिसंबर से पहले भारत आए हैं।

अधिकारियों ने बताया कि सरकार इनसे मूल देश में इन लोगों से धार्मिक उत्पीड़न का सबूत मांगेगी, ऐसी कोई संभावना नहीं है। नियम बना दिए गए हैं लेकिन देश की नागरिकता हासिल करने के लिए लोगों को अपने धर्म को कोई प्रमाण देना होगा। इसमें कोई सरकारी दस्तावेज, बच्चों का स्कूल एनरोलमेंट, आधार इत्यादि दिखाया जा सकता है। साथ ही उन्हें सभी दस्तावेजों को दिखाने की प्रक्रिया पूरी करनी होगी जिससे साबित हो कि वे 2014 दिसंबर से पहले भारत आए थे।

एक अन्य अधिकारी ने बताया कि नियम के तहत अपने धर्म का प्रमाण और 2014 दिसंबर से पहले भारत आने का प्रमाण देना अनिवार्य होगा। हालांकि नागरिकता के लिए बाकी किन दस्तावेजों की जरूरत होगी ये अभी साफ नहीं हो। बता दें कि सीएए को लेकर देशभर में कई जगह विरोध देखने को मिल रहा है। ऐसे में अब दिल्ली के शाहीन बाग की तर्ज पर मुंबई में भी संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) के खिलाफ महिलाओं का विरोध-प्रदर्शन शुरू हो गया है। ये महिलाएं मंडनपुर की सड़क पर बैठकर मांग कर रही हैं कि जब तक केंद्र सरकार सीएए को वापस नहीं लेती है, तब तक वह प्रदर्शन से पीछे नहीं हटेंगी। 60-70 लोगों के समूह का प्रदर्शन रविवार शाम को शुरू हुआ।





प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व कर रहीं कानून की छात्रा फातिमा खान ने कहा कि सरकार को जो मन कर रहा है, वह कर रही है। सरकार ने भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर आजाद को गिरफ्तार किया, जब वे कानून के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। बता दें कि इसके साथ ही केरल, पंजाब और राजस्थान के बाद अब पश्चिम बंगाल विधानसभा में भी इसके खिलाफ सोमवार को प्रस्ताव पास किया गया।

नागरिकता (संशोधन) कानून किस व्यक्ति पर लागू होगा? किसे होगा इसका फायदा?

सीएए या नागरिकता संशोधन कानून पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से 31 दिसंबर 2014 तक धार्मिक उत्पीड़न के चलते भारत आने वाले हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, ईसाई और पारसी समुदाय के लोगों पर लागू होगा. यह कानून इन तीनों देशों के शरणार्थियों को नागरिकता देने के लिए लाया गया है। इसके अलावा इन तीन देशों से भारत आए मुस्लिमों या फिर अन्य विदेशी नागरिकों के लिए यह कानून नहीं है। यदि इन तीनों देशों के धार्मिक अल्पसंख्यक के पास पासपोर्ट, वीजा जैसे दस्तावेज नहीं हैं और वहां उनका उत्पीड़न हुआ हो तो वे भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन कर सकते हैं। नागरिकता (संशोधन) कानून ऐसे लोगों को भारत की नागरिकता पाने का अधिकार देता है। नए नागरिकता कानून के इन लोगों को जटिल प्रक्रिया से राहत मिलेगी और भारत की नागरिकता जल्द पाने में मदद मिलेगी। इसके लिए शर्त यह भी है कि उन्हें भारत में रहते हुए कम से कम छह साल हो गए हों। अन्य लोगों के लिए भारतीय नागरिकता हासिल करने के लिए भारत में कम से कम 11 साल रहना जरूरी है।

पाक में अल्पसंख्यकों का हाल:





धमकियों से तंग आकर पहले ट्विटर छोड़ा, फिर पेशावर से लाहौर बस गए और आखिर में परिवार सहित पाकिस्तान ही छोड़ना पड़ा। यह कहानी है सिख नेता राधेश सिंह की, जिससे पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के साथ हो रहे अत्याचार की एक और भयावह तस्वीर सामने आई है। पाकिस्तान में उसके दावे के विपरीत अल्पसंख्यकों का उत्पीड़न रुकने का नाम नहीं ले रहा है। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब हाल ही में सिख लड़कियों के अपहरण के बाद उनका जबरन धर्मांतरण और ननकाना साहिब पर कट्टरपंथियों के हमले से पाकिस्तान चौतरफा घिरा हुआ है। आपको बता दें कि राधेश पाकिस्तान में सिखों के कद्दावर नेता माने जाते हैं, जो 2018 के आम चुनाव में भी अपनी किस्मत आजमा चुके हैं। वह पेशावर से खड़े हुए थे जिसके बाद धमकियां मिलने का सिलसिला शुरू हो गया।


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