जो भी हो देश तो बदला है मोदी जी ने

Medhaj News 8 Jan 19 , 06:01:39 Governance
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भारत आजाद हुआ 1947 में,  मगर सही मायनों में हमआज तक आजाद नही हुये, आजादी का सही मतलब होता है दुनिया के साथ चलना, नियम का चलना, समय से काम होना,सुविधा होना, गंदगी से भी घृणा न हो इतनी कम गंदगी हो, मगर 1947 से लेकर 2014 तक हम आगे तो आये मगर उतना नही जितना होना चाहिये, कुछ लोग जरूर आगे बढे होंगे मगर कुछ लोग ही, जापान परमाणु अटेक के बाद भी हमसे आगे हैं। मोदी जी ने आगे बढ़ाने की कोशिश की नई ऊर्जा दी ।आप जब भी पूर्वोउत्तर की तरफ जाये तो वहाँ विकास नही है क्या वो भारत का हिस्सा नही है, जबकि भारत की संस्कृति है अनेकता में  एकता है, आसाम के डिब्रूगढ़ से धामजी अरूणाचल प्रदेश की दूरी 170 km थी यानी 4 से 5 घंटा, बृहमपुत्र पहले भी वहीं बहती थी जैसे आज बहती है तब क्यो नही बना ब्रिज ,क्या तब इंजीनियर नही थे, थे मगर सोच नही थी न ही सोच नई थी, बागीबेल ब्रिज बनने से अब आसाम से अरुणाचल महज 15 मिनट का हो गया,क्या ये उपलब्धि नही है, 311 आतंकवादी 1 साल में मारे गये क्या ये उपलब्धि नही है, रेल हादसे में में कमी आना ये उपलब्धि नही है , कई करोड़ टैक्स जमा करने बाले बढे क्या ये उपलब्धि नही है, 2014 में और आज की तारीख में पेट्रोल डॉलर, खाने का सामान आदि अगर ग्रोथ के साथ देखे तो सस्ता है, पाकिस्तान कंगाल हुआ ये उपलब्धी नही है, जी 20 सम्मेलन पहली बार भारत मे होगा क्या ये उपलब्धी नही है, तबांग सिक्किम में एयरपोर्ट बनना ये उपलब्धी नही है, पहले के मुकाबले अब रोज सड़क दुगनी रफ्तार से बन रही है ये उपलब्धी नही है, अरूणाचल में सड़क और रेल लाइन बनी, वो भी चीन के विरोध के बाबजूद, क्या तब चीन नही था या ये उपलब्धी नही है, 230 उपग्रह छोड़े गये ये उपलब्धी नही है, डोकलाम विवाद बिना युद्ध के बिना हारे सुलझ गया क्या ये उपलब्धी नही है, तेल के बदले ईरान 50 % भारतीये समान लेगा बाकी 50% डॉलर में क्या ये उपलब्धी नही है,अब सांसद ,विधायक, अधिकारी अपनी रेड लाइट का रॉब नहीं दिखा पाते क्योकि अब अपनी गाड़ी पे रेड लाइट की धमक कानूनी रूप से सुना नही सकते, नोट बंदी का फैसला अलोकप्रिय है, मगर देश को दुश्मनो को खत्म करने के लिये ये जरूरी था, अप्रिय फैसला कोई नही लेता, न आसान होता है, वो वही लेता है जिसे समाज या देश या देशवासी से प्यार हो,बैंको का सिस्टम इतना क्यो मजबूत नही रक्खा गया कि कोई पैसे लेके भाग जाये, आदिवासी समस्या 60 साल में क्यो नही सुलझी, कश्मीर समस्या क्यो बनी, सफाई पे क्यो ध्यान नही दिया गया, वो इसलिये कि हमने उनको चुना जो जिन्होंने अपने फ़ायदे को चुना,जो भी हो देश तो बदला है। -arYa



 


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