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अयोध्या केस: CJI ने पढ़ना शुरू किया फैसला

Medhaj News 9 Nov 19,16:27:27 Entertainment
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देश के सबसे पुराने और बहुप्रतिक्षित कोर्ट केस अयोध्या राम जन्मभूमि - बाबरी मस्जिद विवाद केस में फैसला सुना रही है। पांच जजों की संवैधानिक पीठ इसके लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुकी है और चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की बैंच बैठने को तैयार है। इस बेंच ने लगातार 40 दिन की मैराथन सुनवाई के बाद बीती 16 अक्टूबर को फैसला सुरक्षित रख लिया गया था। शुक्रवार को चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) की और से इस बारे में जानकारी दी गई थी। उसके बाद से देश में हलचल बढ़ गई। सभी राज्यों में पुलिस अलर्ट पर है और सुरक्षा के पुख्ता बंदोबस्त कर लिए गए हैं। खासतौर पर उत्तर प्रदेश में सुरक्षा व्यवस्था सख्त कर दी गई है। अयोध्या में धारा 144 लागू कर दी गई है। उप्र में स्कूल-कॉलेज सोमवार तक के लिए बंद किए गए हैं, वहीं मध्यप्रदेश व दिल्ली समेत देश के कई राज्यों में शनिवार को स्कूलों में अवकाश घोषित किया गया है। इस बीच, उत्तर प्रदेश समेत पूरे देश में अलर्ट घोषित कर दिया गया है। रात में ही अयोध्या में धारा 144 लगा दी गई। लखनऊ, कानपुर, मुरादाबाद, इलाहाबद, अलीगढ़ समेत कई शहरों में फ्लैगमार्च किया गया। ड्रोन से अयोध्या में नजर रखी जा रही है। इसके अलावा किसी भी संभावित आपात स्थिति से निपटने के लिए अयोध्या और लखनऊ में दो हेलिकॉप्टर को स्टैंडबाय मोड पर रखा गया है।

अब तक क्या कहा:

- सुप्रीम कोर्ट ने सुन्नी वफ्फ बोर्ड के दावे को लेकर कहा है कि बाबरी मस्जिद खाली स्थान पर नहीं बनी थी और जिस जगह पर बनी थी वो इस्लामिक नहीं थी। इस तरह कोर्ट ने सुन्नी वफ्फ बोर्ड के दावे को खारिज कर दिया है। एएसाई ने कहा था कि वहां 12वीं सदी में वहीं मंदिर बना था जिसके सबूत खुदाई के दौरान मिले थे।



- सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पुरातत्व विभाग की खुदाई में जो चीजें मिली थीं उसे नकारा नहीं जा सकता। हाईकोर्ट का फैसला खारिज करने की मांग को गलत करार दिया है। मामले में इससे पहले आया हाईकोर्ट का फैसला पारदर्शी साबित हुआ है।

यूपी के अलीगढ़ में इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई। इसके बाद राजस्थान के जयपुर कमिश्नरेट में सुबर 10 बजे से 24 घंटे के लिए इंटरनेट सेवा को बंद कर दिया गया है। यूपी-नेपाल सीमा पर भी इंटरनेट सेवाओं को बंद कर दिया गया है। 

- सुप्रीम कोर्ट ने केस से जुड़े निर्मोही अखाड़े के दावे को खारिज कर दिया जिसमें उन्होंने पूजा का अधिकार मांगा था। कोर्ट ने कहा कि निर्मोही अखाड़े की तरफ से दाखिल केस 6 साल बाद आया। कोर्ट ने कहा कि निर्मोही अखाड़ा सेवादार नहीं है। हालांकि, रामलला को कोर्ट ने मुख्य पक्ष माना है और कोर्ट ने रामलला को कानूनी मान्यता दी है।

- चीफ जस्टिस ने अपने फैसले में सभी पक्षों द्वारा की गई मांगों को लेकर बोल रहे हैं।

- चीफ जस्टिस ने फैसला पढ़ते हुए माना की मस्जिद 1528 में बनी है इससे फर्क नहीं पड़ता। 22 दिसंबर 1949 को मूर्तियां यहां रखी गईं। यह जमीन नजूल की है और सरकारी है। 1991 के प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट का जिक्र करते हुए कहा कि नमाज पढ़ने की जगह को मस्जिद मानने से इनकार नहीं है। यह एक्ट भारत की धर्मनिरपेक्षता की मिसाल है।



10.32 am: अयोध्या मामले में पांचों जजों ने एकमत से फैसला सुनाया है और चीफ जस्टिस ने फैसला पढ़ा जाने लगा है और अगले आधे घंटे में पूरा फैसला पड़ लिया जाएगा।


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