कारों की मांग घटी, मारुति के सभी प्लांटों में 8 घंटे चलेगा काम
उत्पादन छेत्र अपने सबसे बुरे दौर से गुज़र रहा है। जिसका असर देश में घटती विकास दर से पता लगाया जा सकता है जो की इस साल आईएमएफ द्वारा 7% आंकी गयी है। आईएमएफ के अनुमान के अनुसार, भारतीय अर्थव्यवस्था 2019 में 7 प्रतिशत और 2020 में 7.2 प्रतिशत बढ़ने का अनुमान है। देश की सबसे बड़ी कार निर्माता मारुति सुजुकी त्योहारी सीजन से पहले सभी प्लांटों में उत्पादन बढ़ाने के बजाय घटा रही है क्योंकि डिमांड कई वर्षों के निचले स्तर पर आ गई है। इसका साफ मतलब है कि स्विफ्ट और डिजायर बनाने वाली कंपनी वित्त वर्ष 2019-20 के 4-8 प्रतिशत सेल्स ग्रोथ टारगेट को पूरा नहीं कर पाएगी। मौजूदा वित्त वर्ष के पहले चार महीनों में मारुति सुजुकी की बिक्री में 20 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आई है। इस वित्त वर्ष में कंपनी की ग्रोथ में डबल डिजिट गिरावट का अनुमान है। यह करीब 17 लाख गाड़ियां ही बेच पाएगी।
जुलाई में पैसेंजर गाड़ियों की बिक्री 31.2 प्रतिशत गिरकर 2 लाख यूनिट्स पर आ गई। यह एक महीने में अब तक की सबसे बड़ी गिरावट है। पैसेंजर कार इंडस्ट्री में फैली सुस्ती का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पिछले नौ महीनों से मासिक बिक्री लगातार घट रही है। वहीं, पिछले कुल 13 महीनों में से 12 में बिक्री में गिरावट आई है। इस वित्त वर्ष के पहले चार महीनों में पैसेंजर कार इंडस्ट्री का वॉल्यूम 21.6 प्रतिशत गिरा है। ज़ाहिर है इसका असर इससे जुड़े लोगो पर भी पड़ेगा उन्हें नए रास्ते ढूढ़ने पड़ेंगे।


