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फैशन अपैरल कंपनी Forever 21 दुनिया भर में बंद करेगी अपने 178 स्टोर

Medhaj News 30 Sep 19 , 06:01:39 Business & Economy
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कभी यंगस्टर्स के लिए फैशन ट्रेंड की पहली पसंद रहा फैशन चेन Forever 21 दिवालिया घोषित होने की कगार पर है। अमेरिका की यह मशहूर फैशन अपेरल कंपनी दुनिया भर में अपने 178 स्टोर बंद करने जा रही है। कंपनी ने बैंकरप्सी के लिए फाइल भी कर दिया है। एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, Forever 21 ने Chapter 11 bankruptcy protection के लिए फाइल कर दिया है। लॉस-एंजिलिस बेस्ड कंपनी ने रविवार को बताया कि वो दुनिया भर में अपने 178 स्टोर बंद करेगी। कंपनी ने कहा कि वो अमेरिका में स्थित अपने स्टोर्स और कुछ चुनिंदा इंटरनेशनल स्टोर्स के वैल्यू को बढ़ाने पर फोकस करेगी। कंपनी की ओर से जारी किए गए स्टेटमेंट में कहा गया है कि कंपनी का इरादा US मार्केट छोड़ने का नहीं है, वहीं उसके कुछ इंटरनेशनल स्टोर्स भी पहले की तरह ही ऑपरेट करते रहेंगे।





फॉरएवर 21 की शुरुआत साल 1984 में दक्षिण कोरियाई प्रवासियों डो वॉन चैंग और उनकी पत्नी जिन सूक ने की थी. दक्षिण कोरिया में जन्में डो वॉन चैंग की उन खुशकिस्मत लोगों में नहीं थे जिन्हें बचपन में ही सारी सुख-सुविधाएं मिल जाती है। दक्षिण कोरिया से आंखों में बड़े सपने लेकर अमेरिका पहुंचे चैंग के लिए यह इतना आसान नहीं था। शुरुआती संघर्ष में उन्हें घर का खर्च चलाने के लिए दिन में तीन-तीन काम करने पड़ते थे। वो दिन में बर्तन धोने, गैस स्टेशन पर पार्ट टाइम काम करने के बाद एक कॉफी शॉप में भी काम करते थे।

दिन में तीन-तीन काम करने वाले चैंग का सपना तो कुछ और करने का था। चैंग को शुरुआत से फैशन में रुचि थी. नौकरी करते हुए उन्होंने इसमें अपना कैरियर बनाने की सोची और साल 1984 में 18 साल की उम्र में उन्होंने अपना फैशन रिटेल और क्लोथिंग सेंटर फॉरएवर 21 नाम से लॉस एंजेलिस के हाईलैंड पार्क में खोला। फॉरएवर 21 का जल्दी ही मार्केट में छा गया। फॉरएवर 21 मल्टी नेशनल कंपनी बन गई और 57 देशों में 800 से अधिक स्टोर हैं।

कम दामों पर युवाओं को ट्रेंडी और फास्ट फैशन प्रोवाइड कराने वाली यह कंपनी दुनिया भर के कई देशों में पॉपुलर हुई। लेकिन पिछले कुछेक सालों में युवाओं की फैशन हैबिट बदल गई है, अब फास्ट फैशन का चलन कम हो गया है और इको-फ्रैंडली, ऑर्गेनिक फैब्रिक फैशन को बढ़ावा मिलने लगा है, जिससे ऐसी कंपनियों पर इसका असर पड़ा है। वहीं, ई-कॉमर्स कंपनियों ने भी इन कंपनिों के लिए बाजार में मुश्किल खड़ी की है।


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