जानिए… क्या होते हैं ग्रीन पटाखे
सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में पटाखों पर प्रतिबंध लगाया था। इसके बाद से ग्रीन पटाखों (Green Crackers) को लेकर विचार किया। इस साल बाजार में ग्रीन पटाखे तो आए हैं, लेकिन यह रतलाम तक नहीं पहुंचे हैं। हमारे शहर के व्यापारियों ने पटाखा दुकानें लगाने की तैयारी कर ली है। शहर में तीन जगह पटाखा बाजार लगेगा, आंबेडकर ग्राउंड में 44, बरबड़ ग्राउंड में 48 व त्रिवेणी में 92 पटाखा दुकानें लगेगी। मंगलवार को दुकानों के लिए आवेदन फार्म दिए गए है। आइए जानते है कि क्या होते है ग्रीन पटाखे | ग्रीन पटाखे (Green Crackers) दिखने, जलाने और आवाज़ में सामान्य पटाखों की तरह होते हैं, लेकिन प्रदूषण कम करते हैं। सामान्य पटाखों की तुलना में इन्हें जलाने पर 40 से 50 फीसदी कम हानिकारक गैस पैदा होती है। सामान्य पटाखे जलाने से भारी मात्रा में नाइट्रोजन और सल्फर गैस निकलती है। यह बच्चों व बुजुर्गों के लिए हानिकारक होती है। सुप्रीम कोर्ट ने बेरियम नाइट्रेट पर पाबंदी लगाने का कहा है। बेरियम नाइट्रेट के बिना ग्रीन पटाखे बनाना महंगा होता है। इसका विकल्प पोटेशियम पेरियोडेट है जो कि 400 गुना महंगा होता है। ऐसे में पटाखा बनाने वाले ग्रीन पटाखे (Green Crackers) बनाने में रुचि नहीं ले रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने साल 2018 में पटाखों पर प्रतिबंध लगा दिया था | इसके बाद ग्रीन पटाखों पर विचार किया गया | वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) ने ग्रीन पटाखों को बनाने में अहम काम किया | पटाखा कंपनियों से करीब 230 सहमति-पत्रों और 165 नॉन डिसक्लोजर एग्रीमेंट्स (NDA) पर हस्ताक्षर किए हैं | दुनिया में सबसे ज्यादा पटाखों का उत्पादन चीन में होता है | सरकार का दावा है कि इन पटाखों में धूल को सोखने की क्षमता है | साथ ही इन पटाखों से होने वाला उत्सर्जन लेवल भी बेहद कम है | इनमें पटाखों का एक फॉर्म्युला ऐसा भी है जिससे वॉटर मॉलेक्यूल्स यानी पानी के अणु उत्पन्न हो सकते हैं जिससे धूल और खतरनाक तत्वों को कम करने में मदद मिलेगी | अंग्रेजी के अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर के मुताबिक, आमतौर पर मिलने वाले पटाखों के मुकाबले ग्रीन पटाखे महंगे है | आमतौर पर फुलझड़ी के एक पैकेट (10 पीस के साथ) की कीमत 200 रुपये होती है | लेकिन इस बार दिवाली के मौके पर पुरानी दिल्ली में ग्रीन पटाखों वाली फुलझड़ी की कीमत 400 रुपये है | ग्रीन पटाखों के तहत मिलने वाली चकरी के 10 पीस वाला बॉक्स 550 रुपये में मिल रहा है | वहीं, आमतौर पर इसकी कीमत 250 रुपये है |
देश के सबसे बड़े बाजार शिवकाशी में भी 2 प्रतिशत से भी कम ग्रीन पटाखे हैं। यहां भी 98 प्रतिशत पटाखे नॉर्मल तरीके से ही बनाए जा रहे हैं। हमारे शहर के व्यापारियों ने बताया थोक में भी सामान्य पटाखे ही थी, ग्रीन पटाखे का विकल्प ही सामने नहीं आया। बुधवार को दोपहर 12 बजे तक व्यापारी इन्हें जमा कर सकेंगे। गुरुवार को 2 बजे तक निगम में दुकानों के टेंडर खोले जाएंगे। गुरुवार से ही पटाखा बाजार सजना शुरू हो जाएगा। इस साल बाजार में सतरंगी, 100 शॉट, 12 कलर के अनार, बच्चों को लुभाने के लिए छोटा भीम, डाेरेमोन आदि पटाखे रहेंगे। कलेक्टर रुचिका चौहान ने मंगलवार को आदेश जारी कर कहा पटाखे अज्वलनशील शेड में रखें जाएंगे, शेड सुरक्षित होना चाहिए। पटाखों के कब्जे और विक्रय के शेड एक दूसरे से कम से कम 3 मीटर और सुरक्षित काम के 50 मीटर की दूरी पर होंगे। शेड में या शेड की सुरक्षित दूरी के बीच तेल से जलने वाले लैंप, गैस लैंप या खुली बत्तियों का उपयोग नहीं किया जाएगा।

